तपस्वी सम्राट 108 आचार्य सन्मति सागर महाराज का समाधि दिवस धूमधाम से मनाया गया पंचामृत एवं108 कलशो से किया दुग्धाभिषेक
बांसवाड़ा
आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रशम सागर मुनि श्री 108साध्य सागर मुनि श्री108 संयत सागर महाराज बाहुबली कॉलोनी मांगलिक भवन में विराजमान है प्रातः मुनिसंघ के सानिध्य में सुमति नाथ दिगंबर जैन मंदिर में तपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी महाराज का समाधि दिवस धूमधाम से मनाया गया प्रातः काल जिन अभिषेक शांतिधारा के बाद आचार्य सन्मति सागर जी महाराज का पंचामृत अभिषेक 108 कलश से दुग्धाभिषेक शांतिधारा गुरुदेव के मुखारविंद से हुई। शांतिधारा लाभार्थी परिवार राजमल तलाटी परिवार एवं गुरु भक्तों द्वारा की गई।
समाज के प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने बताया गुरुदेव ने अपने प्रवचन में बताया हमारे जीवन को अगर पवित्र बनाना है तो प्रभु का गुरु का गुणगान करो स्वच्छ जीवन तो हमने बहुत बना दिया मगर पवित्रता का जीवन नहीं जिया है युग श्रेष्ठ आचार्य शिरोमणि श्री सन्मति सागर जी महाराज का चोहदवा समाधि दिवस मना रहे हैं उन्होंने अपना जीवन दृढ़ता से साधना की कितने भी आंधी तूफान परेशानी आई मगर उन्होंने कभी भी अपने जीवन मे उसको हावी नहीं होने दिया

आचार्य गुरुवर ने 10000 के लगभग उपवास एवं कठोर तप किया साधना काल में अनेक वर्षों से अन्न सहित अनेक वस्तुओं का त्याग सिर्फ मट्ठा का आहार वह भी एक साथ 2 दिन छोड़कर तो कभी-कभी अनेक दिन छोड़कर ग्रहण करते थे उनकी तपस्या विश्व को अचंभित करने वाली थी व उनको दिखावा प्रदर्शन आडंबर को तनिक भी स्थान नहीं दिया यश कीर्ति की बिल्कुल चाह नहीं आपके आहार में कई बार केशरी चरण चिन्ह अंकित हुए जो आज भी यथावत है



ऐसे महान साधक महान तपस्वी चारित्र चूड़ामणि संत के विषय मे जितना कहा जाये कम होगा कही बार देखा गया रात्रि तीन बजे उठकर एक टांग पर खडे रहकर साधना करना एक उपवास एक आहार वो भी छाछ और पानी धन्य हो ऐसे निष्प्रह साधक जिनवाणी के ज्ञाता एक छोटे से पाटिया पर अपना विश्राम करना जो एक निष्प्रह साधक ही कर सकता है संघ मे अनुशासन आपको अत्यंत प्रिय था कुंजवन उदगाव वो पावन स्थान है जहां पूज्य गुरुवर की अंतिम क्रिया हुई मंच का संचालन महिपाल शाह द्वारा किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
