संत समागम से पुण्य का अर्जन होता है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
साबला
मानव जीवन कई वर्षों के संचित पुण्य के कारण मिला है, इसलिए शुभ अशुभ जैसा कार्य करेंगे वैसा ही फल भोगना होगा ,क्योंकि कर्म सबको समान फल देता है ।मनुष्य पर्याय में अशुभ क्रिया से जन्म व्यर्थ हो जाएगा । संचित पुण्य के कारण उच्च तीर्थंकर जैन कुल में जन्म लिया है इसलिए भगवान के प्रतिदिन दर्शन ,अभिषेक, पूजन स्वाध्याय ,भक्ति ,स्तुति करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा कर्म नष्ट होते है ।
यह प्रवचन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री अजीतकीर्ती गिरी से विहार कर अनेक साधुओं की जन्म एवम् दीक्षा स्थली साबला नगर प्रवेश में आयोजित धर्म सभा में प्रकट किए । आचार्य श्री ने आगे बताया कि पाप से बचने के लिए अच्छे कार्य करना चाहिए जिससे पुण्य की प्राप्ति हो क्योंकि संसार के परिभ्रमण से छुटकारा पाने का माध्यम पुण्य ही है इसलिए साधु संगति ,समागम से पुण्य का संचय होता है प्रतिदिन साधुओं की सेवा करने से व्यक्ति संसार रूपी भव समुद्र से पार हो सकता है ।



साधुओं को देखने से जीवन में उपसर्ग सहन करने की क्षमता और संयम धारण करने की प्रेरणा मिलती है क्योंकि साधु का मतलब समता होता है आचार्य श्री ने अनेक पुराने प्रसंग का जिक्र कर बताया कि हम दीक्षा गुरु के साथ सन 1982 में मुनि अवस्था में साबला आए थे तब आचार्य श्री धर्म सागर जी ने 3 दीक्षा साबला में दी थी। फिर आचार्य श्री अजीत सागर जी के साथ वर्ष 1989 में आए थे। हमारा पुण्य था कि मेरे गुरुदेव का समाधि के पूर्व सेवा करने का अवसर मिला। सन 1990 में गुरुदेव से समाधि के कारण वियोग हुआ। बसंत लाल सराफ,महेंद्र,राकेश,बहादुर मल ने बताया कि प्रवचन के पूर्व आचार्य संघ का श्री अजित कीर्ति गिरी से साबला प्रवेश हुआ आचार्य संघ ने सभी जिनालयो के दर्शन किए। ब्रह्मचारी गजू भैय्या राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में आगामी वर्ष में 21 जनवरी 2024 से 25 जनवरी 2024 तक सलूंबर में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा होगी
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सलय भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
