तन को तपाने से नहीं मन को तपाने से हमारा जीवन सुधर जाएगा। अजित सागर महाराज
सागर
दूध को तपाने से मलाई बनती है।और फिर घी निकलता है। स्वर्ण को तपाने से ही उसमें उज्जवलता आती है। तन को तपाने से नहीं मन को तपाने से हमारा जीवन सुधर जाएगा।
यह बात मुनिश्री अजित सागर महाराज ने कही। गुरुवार को विद्यासागर नगर पंचबालयति मंदिर में चल रहे

पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव में उन्होने कहा कि मनुष्य शरीर के अंदर है। इसे उद्घाटित और तीसरे दिन धर्मसभा को संबोधित कर मिला है तो तप करो।



दिव्य प्रकाश मनुष्य का विरोध करना ही तप है। इसके
लिए दृढ़ इच्छा शक्ति होना चाहिए।इच्छाओं का विकास होने से कर्मों का नाश नहीं होता है। इस अवसर पर मुनिश्री निर्लोभ सागर महाराज ने कहा कि भोग भोगने से भोगकी चाहत खत्म नहीं होती है। यदि शास्त्र पढ़ने की रुचि नहीं है तो आप लंबे समय तक संसार में रहने वाले पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव के तीसरे दिन धर्मसभा को संबोधित करते मुनिश्री हैं। शास्त्र आपकी आत्मा को अंदर सेचमकाते हैं। उन्होंने कहा भोजन
जीने की कला देता है। वहीं शास्त्र आत्म कल्याण के लिए
आपके लिए जरूरी है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
