गजरथ फेरी के साथ पंचकल्याणक महोत्सव का हुआ समापन जो रागद्वेष की प्रवृत्ति को छोड़ देता है उसे ही मोक्ष प्राप्त होता है मुनिश्री अजितसागर महाराज

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गजरथ फेरी के साथ पंचकल्याणक महोत्सव का हुआ समापन जो रागद्वेष की प्रवृत्ति को छोड़ देता है उसे ही मोक्ष प्राप्त होता है मुनिश्री अजितसागर महाराज
सागर
परम पूज्य प्रशममूर्ति,मुनिश्री 108 अजितसागर जी महाराज,
ससंघ 07 पिच्छी पावन पुनीत मंगल सानिध्य में एवं प्रतिष्ठाचार्य ब्र.विनय भैया बण्डा के विशेष निर्देशन मे श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर वर्द्धमान कालोनी,, सागर में नवनिर्मित मानस्तंभ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में शनिवार को प्रातःकाल अभिषेक-शांतिधारा, पूजन तत्पश्चात कैलाश पर्वत से भगवान आदिनाथ का निर्वाण, सिद्ध गुणारोपण, मोक्ष कल्याणक एवं हवन। मुनिश्री ससंघ के विशेष मंगल प्रवचन, हुए।सुबह विशाल गजरथ महोत्सव एवं रथयात्रा निकाली गई।1:00 बजे से मानस्तभ में जिनबिम्ब स्थापित और प्रथम महा मस्तकाभिषेक, मुनिसंघ के समापन के अवसर पर विशेष मंगल प्रवचन एवं उपस्थित समिति,संमस्त अधिकारियों का विशेष सम्मान समारोहस्वरूप अनूठा आयोजन सम्पन्न हुआ।

 

 

 

समारोह के अनुपम क्षणों में पूज्य मुनि श्री अजितसागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जो राग द्वेष की प्रवृत्ति को छोड़ देता है उसे ही मोक्ष प्राप्त होता है। महाराज श्री ने कहा कि दुनिया में मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों के बाद मिला है।

और प्रत्येक मनुष्य कर्मों की गठरी को सिर पर रखकर घूम रहा है। जब तक दुख का अनुभव होता है तो सुख का नहीं होता है। जब सुख का अनुभव होता है तो दुख भूल जाते हैं।

महाराज श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि वह दुनियादारी से मुक्त हो जाए लेकिन जी ने बाहर में ही जीने की आदत हो गई है उसे यही सांसारिक जीवन अच्छा लगने लगा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अकर्मण्य व्यक्ति मोक्ष नहीं जाता है। जो सब कुछ जोड़कर छोड़ता है। राग द्वेष की प्रवृत्ति को छोड़ देता है उसे ही मोक्ष प्राप्त होता है
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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