आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ का पिच्छी परिवर्तन समारोह 16 नवंबर को होगा एवम 19 नवंबर को साबला की और विहार
उदयपुर
वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज संघ का 16 नवंबर को पीछी परिवर्तन होगा।
आचार्य श्री के संघ में आचार्य श्री सहित 32 साधु संत संघ में है। बीसा हूमड़ भवन में 55 वा वर्षायोग पूर्ण कर 16 नवंबर को पीछी परिवर्तन होगा।इसके उपरांत 19 नवंबर को उदयपुर से साबला की और अतिशय क्षेत्र अणिंदा के दर्शन कर विहार होगा। आचार्य श्री 8 मुनिराज,21 माताजी तथा 2 क्षुल्लक जी कुल 32 साधु है।

आचार्य श्री के संघ की विशेष बात यह है की संघ में जहां 80 वर्ष से अधिक के साधु है वही 26 वर्ष के भी साधु है।अनेक साधु अत्यधिक संपन्न परिवार से ,उच्च शिक्षित ,भाई भाई, पति पत्नी ,पिता बेटी, दादा पोती, आदि एक ही परिवार के अनेक साधु भी है।
पीछी में 5 विशेष गुण होते हैं
आचार्य श्री के शिष्य मुनिश्री 108 हितेंद्रसागर जी महाराज ने बताया कि पीछी के 5 गुण होते हैं

धूल ग्रहण नही करना,कोमलता, लधुता ,पसीना नही करना, सुकुमार झुकने वाली होती हैं
पीछी जिन मुद्रा और करुणा की प्रतीक हैं भूमि के मार्जन सफाई करने पर लघु जीवो की विरादना नहीं होती।मुनि श्री ने आगे बताया कि पीछी के बिना अहिंसा महाव्रत का,आदान निक्षेपण समिति नहीं पल सकती हैं,प्रति लेखन शुद्धि के लिए पिच्छिका अनिवार्य है। मयूर पंख की पीछी देने से श्रावक को पुण्य की प्राप्ति होती है

दिगम्बर साधुओं की पहचान मयूर पीछी कमंडल से होती है दीपावली के बाद कार्तिक कृष्णा अमावस्या के पूर्व चतुर्दशी को भारत के समस्त दिगंबर साधु उपवास करते हैं तथा अमावस्या को चातुर्मास कलश का निष्ठापन क्रिया समस्त साधु करते हैं इसके बाद समाज की अनुकूलता अनुसार पीछी परिवर्तन किया जाता है। चातुर्मास निष्ठापन के बाद अनिवार्य रूप से पीछी बदली जाती हैं अनेक नगरों में पीछी की बोली लगती हैं अथवा चातुर्मास में विशेष सहयोग देने वाले परिवारों या त्याग संयम व्रत नियम अनुसार भी दी जाती हैं।
वर्तमान में 1700 से अधिक दिगंबर साधु है । पीछी तैयार करने के लिए मोर पंख की आवश्यकता होती है जो अधिकांश आचार्य आर्यिका संघ में निवाई के श्री गोपाल , श्री संभव ,अविनाश,आशु,शुभम अग्रवाल द्वारा निशुल्क स्वयं के साधन और व्यय से उपलब्ध कराए जाते हैं। गोपाल जी अग्रवाल जैन मो no 9214663926 उदयपुर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के 40 से अधिक साधुओं के लिए मोर पंख प्रदान करने आए।
विशेष चर्चा में आपने बताया कि वर्ष 2023 में आपने 450000 पंख भारत के अनेक राज्यों के आचार्य संघ में वितरित किए। एक प्रश्न के उत्तर में आपने बताया कि वर्तमान में अच्छी क्वालिटी एवम् बड़ा पंख 6 रुपए से 7 रुपए के मध्य निजी क्रय करते हैं,इसके लिए उन्हें अग्रिम राशि भी भुगतान करना होती हैं। आपने बताया कि यह कार्य आप सन 1995 के पूर्व से पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवम आचार्य श्री पद्म नंदी जी की प्रेरणा से दान भावना को लेकर करते हैं । जब कार्य प्रारंभ किया तब एक मोर पंख की लागत केवल 25 पैसा थी। शुरुवात में 12000 पंख वितरित किए। आपकी सेवा भावना के कारण अनेक नगरों की मांग आने पर संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में लगभग 30 लाख के पंख और आवागमन व्यय मिलाकर 35 लाख से अधिक की राशि के पंख दान करते हैं सबसे बड़ी बात यही है कि इस कार्य में परिवार ने भी पूरा सहयोग किया है।जैसे जैसे दान बढ़ता गया,व्यापार में भी दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि होती गई। आपने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी,आचार्य श्री कुंथू सागर जी,आ श्री कनक नंदी,श्री पद्म नंदी आचार्य श्री विराग सागर जी,आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज सहित तीनो परंपरा के साधुओं को स्वयं जाकर पंख देते हैं
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
