सभी को मंगल कार्य की प्रेरणा देते हुएं आत्मानंदित करते हैं वर्तमान की चकाचौंधता में इस तरह के स्वर्णिम दृश्य
रामगंजमंडी
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अंकित किया गया ये दृश्य जहां दो नन्हे नन्हे बालक जिनवाणी मां को पढ़ते हुए भगवान के गुणानुवाद का प्रयास कर रहें हैं। जैसे ही इन दोनों को यह कार्य करते हुए देखा तो एक क्षण के लिए हृदय में दोनों के प्रति वात्सल्य का झरना फूट पड़ा।
आश्चर्य जब समस्त संसार गहन निंद्रा में समाया हुआ था तब ये दोनों बालक जिनाभिषेक के बाद प्रयास करने लगे जिन पूजा का। सचमुच धन्य हैं इन दोनो की यह श्रेष्ठ भावना जो आजकल के बच्चों के लिए ही नहीं वरन बड़ों के लिए प्रेरणा के साथ साथ दर्पण दिखाने का कार्य कर रहें हैं।

आज से लगभग 3-4 दशक पूर्व समूचे समाज में बाल से आवृद्ध तक घर के सभी बच्चें प्रातः काल मंदिरों में जमा रहते थे और भगवान के श्री चरणों में पहुंचकर अपने दिन की शुरूवात करते थें। लेकिन काल के चक्र ने वर्तमान में ऐसी विसंगतियां उत्पन्न करी कि आजकल सभी मंदिर सुने पढ़ने लगे सभी धार्मिक स्थल पर इस सूनेपन का कारण मात्र ये आलसीपना और धर्म विमुख पारिवारिक माहौल ही हैं।



वास्तविकता में संपूर्ण समाज और देश को इन दोनो बालकों से शिक्षा लेते हुए धर्म के प्रति अपने दैनिक कर्तव्य को समझते हुए भगवान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए उनका गुणानुवाद करना ही चाहिए।
क्योंकि अगर परमात्मा का आशीर्वाद नही होता तो ना जाने हम मनुष्य ना बनकर कौनसी गति में भटक रहे होते पशु बनकर विवेक रहित अवस्था में दु:खों से घिरे होते।

इसलिए आज हमें इन दोनो बच्चों से शिक्षा लेकर अपने मनुष्य जन्म की श्रेष्ठता का एक मात्र कारण अपने धर्म के प्रति श्रद्धावान रहना ही चाहिए।
प्रशांत जैन आचार्य से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
