एमडी जैन इंटर कॉलेज हरीपर्वत में हुआ तीन दिवसीय श्रमण संस्कृति पाठशाला महाअधिवेशन का शुभारंभ

धर्म

एमडी जैन इंटर कॉलेज हरीपर्वत में हुआ तीन दिवसीय श्रमण संस्कृति पाठशाला महाअधिवेशन का शुभारंभ

आगरा

21 अक्टूबर से आगरा के हरीपर्वत स्थित श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य एवं भारतवर्षीय श्रमण संस्कृति परीक्षा बोर्ड सांगानेर जयपुर के तत्वावधान में तीन दिवसीय श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति पाठशाला महाअधिवेशन का शुभारंभ हुआ|

 

 

 

 

श्रमण संस्कृति पाठशाला महाअधिवेशन के प्रथम दिन पाठशालाओं के बच्चों ने ढोल बजाते हुए गुरू का स्वागत किया| पाठशाला महाधिवेशन की शुरूआत भोपाल स्थित शंकराचार्य़ नगर के पाठशाला परिवार द्वारा मंगलाचरण के साथ हुई|

 

मंगलाचरण के इसी क्रम में दमोह स्थित कलिंदी मंदिर पाठशाला के विद्यार्थियों ने भी गुरू को नमन करते हुए नृत्य की प्रस्तुति दी| इसी बीच अमेरिका से आई दानचंद्रिका की उपाधि से अलंकृत श्रीमती आशारानी पाण्डया एवं समस्त पाण्डया परिवार का स्वागत-सम्मान श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति द्वारा किया गया साथ ही कलकत्ता, सूरत और प्रयागराज से आये वरिष्ठजनों का सम्मान भी हुआ| तत्पश्चात गणमान्य बंधुओं द्वारा संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्जव्वलन किया| इसके बाद बाहर से आये हुए गुरुभक्तों ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया|

 

निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज जी अपने मंगल प्रवचन में कहा कि साँप,बिच्छू को देखते ही लोगो को मारने का भाव आता है क्योंकि पूर्वभव में कभी उसने एक बार स्वयं को मारने का भाव किया होगा। नियम लो कि मैं कभी मरने का भाव नही करूँगा, इसके परिणाम से तुम्हारा कभी अकाल में मरण नही होगा l तुम कही खुद की किस्मत से परेशान तो नहीं हो और ज्ञानी व्यक्ति तो खुद की किस्मत से ही परेशान होता है, वह कभी दूसरे व्यक्ति को दोष देता ही नहीं। जैनाचार्यो ने सबसे पहले इसी बात पर सोचने को कहा-तुम परेशान दिखते हो, कंही खुद से परेशान तो नही हो, तुम भली दूसरे को दोष दे रहे हो लेकिन तुम्हारी किस्मत ही तुम्हारा साथ नही दे रही है। तुम अच्छा कर रहे हो, बुरा हो रहा है क्या तुम्हें विश्वास है कि हमारा कोई भी व्यक्ति हमारे विरोध में नही जा सकता है,

 

हमे रुलाएगा भी नही, बहुत कठिन है हम अपनो की ही घोषणा नही कर पा रहे। यह दावा तुमने कर लिया कि मेरे परिवार में कोई मेरा कुछ भी नही बिगाड़ सकता तो जाओ दुनिया का कोई भी व्यक्ति तुम्हारा कुछ भी नही बिगाड़ सकता। बस तुम अपना बिगाड़ मत करना और तुम्हारे लोग तुम्हारा बिगाड़ न कर पाए। णमोकार मंत्र की इतनी बड़ी शक्ति है कि सारी दुनिया में जितनी सेनाये हैं,उन सेनाओं से ज्यादा ताकत णमोकार मंत्र में है। जैसे जिसका किला अभेद्य हो,चारों तरफ से सैनिक लगे हो,वो राजा घबराता नहीं है, बोले कुछ नही,दुश्मन अंदर आ ही नही सकता

,ऐसे ही जिनेंद्र भगवान ने कहा है कि सारे देवता मिलकर के आ जाये, सारी दुनिया मिलकर के आ जाये बस चारो तरफ से णमोकार मंत्र की सेना बिछा देना और दुनिया से कह देना हिम्मत है तो छूकर दिखाए। गाड़ी का एक्सीडेंट होने ही वाला है| आप आँख बंद कर लेना खोलना मत एक्सीडेंट मत देखना,णमो अरिहंताणं कह देना बाद में सब ठीक हो जाएगा। अभेद्य कवच है णमोकार मंत्र आगम से प्रमाण है सेनाओं के कवच भेदे जा सकते है णमोकार मंत्र का कवच जिसने पहन लिया उसको भेदा नही जा सकता। बस हमे महसूस होना चाहिए कि मैंने चारो तरफ णमोकार मन्त्र का कवच बिछा दिया है, अब कुछ नही हो सकता l एक नियम तुम्हे लेना है कि मैं अपनो का घात नही करूँगा अपनो को दुख नही दूँगा। पूरी समाज पूरे घर के लोग यह नियम ले लेवे तो तुम्हे स्वर्गो की जरूरत नही पड़ेगी तुम्हारा घर ही स्वर्ग हो जाएगा।

 

 

णमोकार मंत्र भक्तामर स्तोत्र दुश्मन से रक्षा कर सकता है, तुम्हारे अपनो से नही,उसके लिए ये नियम ही तुम्हे बचा सकता है। यह नियम नही ले सकते तो यह नियम लो कि मैं अपना घात नही करूँगा। जिन कारणों से मेरी जिंदगी में दुख आते हैं, मैं अपने आपको दुःखी नही करूँगा और आत्मघात नही करूँगा और ऐसा कोई कृत्य नही करूँगा जिससे मुझे खुद दुख उठाना पड़े, मेरी जिंदगी खतरे में पड़ जाए। जिसकी जिंदगी स्वयं से खतरे में है उसकी जिंदगी को कोई सुरक्षित नही कर सकता,ये पत्थर की लकीर लिख लेना। सारी दुनिया तुम्हे मारेगी क्योंकि तुमने खुद अपने आपका घात किया है। जो व्यक्ति स्वयं मरता है, आत्मघात करता है उसे सैकड़ो बार दुनिया मारती है| सैकड़ो बार जन्म ही नही लेनी देती, गर्भपात कराती है क्योंकि इसने एक बार आत्महत्या की थी,अपने आप को मारने का भाव किया था।अपने आपको मारने का भाव करने पर सारा जगत का तुम्हे देखते ही मारने का भाव बनेगा या तो गर्भपात होगा या साँप,बिच्छू बनोगे। साँप, बिच्छू को देखते ही मारने का भाव आता है।

क्योंकि पूर्वभव में कभी उसने एक बार स्वयं को मारने का भाव किया होगा। नियम लो कि मैं कभी मरने का भाव नही करूँगा,इसके परिणाम से तुम्हारा कभी अकाल में मरण नही होगा।
संसार के किसी भी घर मे चोरी कर लेना इस पाप का माफीनामा है जमानत पर तुम छूट जाओगे,कोई सजा नही मिलेगी लेकिन यदि तुमने अपनो से चोरी की है अपनो की चोरी की है।

 

कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल एवं मुख्य कार्यक्रम संयोजक प्रदीप कुमार जैन शास्त्री द्वारा किया गया| पाठशाला अधिवेशन में पूरे देशभर की पाठशाला के 6000 छात्रा-छात्राएं शिक्षक,शिक्षिकाओं सहभागिता कर रहे हैं| मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि श्रमण संस्कृति पाठशाला महाअधिवेशन के दूसरे दिन 22 अक्टूबर को आगरा के छीपीटोला स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैसवाल जैन पंचायती मंदिर से सुबह 7:00 से लगभग 6000 की संख्या में छात्र-छात्राएं,महिलाओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ हरीपर्वत जैन मदिर तक धर्म प्रभावना शोभायात्रा निकाली जाएगी|

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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