आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के समीप पहुंचकर दर्शन कर गदगद हुए रामगंजमंडी के नीरज जैन योगेश जैन

धर्म

आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के समीप पहुंचकर दर्शन कर गदगद हुए रामगंजमंडी के नीरज जैन योगेश जैन
रामगंजमंडी
9 अक्टूबर 2023 की मंगल बेला में प्रातः कालीन रामगंजमंडी नगर के भक्तों का समूह जिसमे 125 यात्री शामिल थे। इस यात्रा समूह ने चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ पहुंचकर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के दर्शन किए।

 

 

 

 

इन सभी ने दर्शन कर अपने आप को सौभाग्यशाली माना। यह एक बहुत ही पुण्य का अवसर माना जाता है कि पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की एक झलक सभी को मिल जाए गुरुवर की एक मुस्कान हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है और पुण्य का संचय करने वाली होती है।

रामगंजमंडी के संत सेवा को समर्पित श्री नीरज जैन एवम योगेश जैन को जब पूज्य गुरुदेव के समीप जाकर उनके दर्शनों का लाभ मिला। तो वह गदगद और भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अनंत जन्मों का कोई पुण्य उदय में आया है आज मुझे साक्षात धरती के भगवान के दर्शन हुए हैं। बस गुरु की छवि को निहारता रहा और उन्हें एक टक देखता रहा। और मन कह रहा था कि गुरुदेव तो सच में साधना के सुमेरु हैं।
मेरा मन हिलोरे मारते हुए कह रहा था मेरी तो पतंग उड़ गई है मेरी तो डोर बंध गई है। उनका कहना था कि जब गुरुदेव के हाथ आशीष मुद्रा को उठे और उनकी जब मुस्कान देखी। तो मेरे मन में भाव आया जो सचमुच साक्षात परिलक्षित हुआ और होता है।


मुस्कान से जिनके खिल जाए कलियां
चरण जिनके बतलाए जन्नत की गलियां।
यह सागर से गहरे हिमालय से ऊंचे इन्हें कौन बांधे इन्हें कौन रोके।
गुरुदेव बस नजर झुकाए अपनी साधना में लीन थे। जो उन्हें देख लेगा बस यही कहेगा गुरुदेव तो पंचम युग में चतुर्थ युग की चर्या का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि मेरे अंदर एक रोशनी सी आ गई और मुझे पूज्य मुनि श्री क्षमा सागर महाराज की वह काव्य रचना स्मृति में आ गई।
दीप उनका, रोशनी उनकी चल रहा हूं मैं, रास्ते उनके, सहारे भी उनके, बस चल रहा हूं में, बस चल रहा हूं मैं, हर प्राण उनके, सांस उनकी बस जी रहा हूं मैं।
सचमुच गुरु की वाणी बोलती है और उनके मुख कोई बात नहीं। धन्य उसी का जीवन हो जाता है जिस पर गुरु का हाथ हो जाता है।

नीरज एवम योगेश कहते हैं कि मैं अपने जीवन के सबसे स्वर्णिम पल मानता हूं कि मुझे ऐसे महान संत के समीप जाकर
उनके मंगल आशीष का सौभाग्य मिला हो। उनके चरण सान्निधि मेरे जीवन में नव ऊर्जा का संचार कर गई।

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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