जीवन में मनुष्य ने दिखावटी रूप धारण कर रखा है सुव्रतसागर महाराज
बीना
पूज्य मुनिश्री 108 सुव्रतसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज जो हमारे मन में अवरोध अज्ञानता आ गई है इसका कारण है मिलावट,सजावट, दिखावट और गिरावट।
उन्होंने कहा यह ऐसे ऐसे बिंदु है जो निरंतर हमारे धर्म को गिरावट की ओर ले जा रहे हैं। इसका आशय बताते हुए कहा कि सामाजिक जीवन में मनुष्य ने अपना दिखावटी
रूप धारण कर रखा है। व्यक्ति ऊपर से कुछ और होता है, देखने में कुछ और होता है,और अंदर से कुछ और होता है। इससे तो कौवा अच्छा होता है जो अंदर भी काला होता है और बाहर भी काला होता है। दूसरा बगुला जो ऊपर से सफेद होते हुए भी अंदर से कालेपन का काम करता है। इसी प्रकार हमारी आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए जो रास्ता है वह हमारे मुनिवर के पास होता है। इस दुनिया में हमेशा लोगों को दुख पहुंचाने का ही कार्य हुआ है।


महाराज श्री ने कहा कि हमारे समाज में एकता में विभिन्नता दिखाई देती है समाज में मीठा बोलकर भी हम अपना उचित स्थान बना सकते हैं। उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार कोयल की आवाज ही उसकी पहचान होती है। और दूसरी और कौवा होता है जिसकी आवाज से हमे घृणा के भाव आते हैं। क्योंकि कौवा बगुले की तरह ही विश्वासघाती की श्रेणी में आता है। अब हमें सोचना है कि हम जीवन में कौवा बनकर रहना चाहते हैं या कोयल।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
