अपने जीवन मे संकल्प करो कि मैं सदा धर्म और धर्मात्माओ की रक्षा करूँगा1.50 लाख श्रीफल हुए समर्पित सुधासागर महाराज
आगरा
30 अगस्त को निर्यापक मुनिपुगंव 108 सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्रमण संस्कृति रक्षक विधान का आयोजन किया गया। एवम आगरा के हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में भगवान श्रेयांसनाथ का निर्वाण कल्याण महोत्सव एवं श्रमण रक्षाबंधन पर्व मनाया गया।


शुभम जैन आगरा ने बताया की प्रातः6 बजे से भगवान श्रेयांसनाथ का 108 कलशों से अभिषेक किया गया व 11 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। श्रीमती शशि पाटनी एव संस्कृति जैन और समकित जैन के निर्देशन में संगीतमय पूजन के साथ प्रथम लाडू चढ़ाने का सौभाग्य सुचि पाटनी आर. के. मार्बल को प्राप्त हुआ| द्वितीय लाडू चढ़ाने का सौभाग्य ललित जैन डायमंड को प्राप्त हुआ। तृतीय लाडू शिखर चन्द जैन सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ।

उसके उपरान्त प्रारम्भ हुआ रक्षा श्रमण संस्कृति रक्षा विधान जिसमें 220 परिवारों द्वारा 700-700 श्रीफल समर्पित किये गये। इस विधान के लिए 1.50 लाख श्रीफल समर्पित किए गए। मिली जानकारी अनुसार श्रीफल कर्नाटक से मंगवाए गए थे।

आपको बता दें आगरा के इतिहास में प्रथम बार रक्षा श्रमण संस्कृति रक्षा विधान का आयोजन किया गया| विधान के मध्य में मुनिश्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग महान पुरूष ऐसे होते है जिन महान। पुरुषों की चेष्टाएँ स्वयं का तो कल्याण करती ही है साथ ही सारे जगत का कल्याण करती है। कुछ वस्तुये ऐसी है जो स्वयं के लिए सुख तो देती है लेकिन जो दूसरों के लिए भी कल्याण करती है ऐसे भी दिन आते है। कुछ महापुरुषों की घटनाएं पर्व और त्यौहार का रूप ले लेते है। जब भी कोई शुभ समाचार मिले तो उसको अपने तक छुपाकर नही रखना चाहिए| तुरंत उसको जितना ज्यादा प्रचार हो सके करना चाहिए। मुनियों का दर्शन सदा मंगलकारी होता है,शगुन होता है।संवाद सज्जन लोगो से किया जाता है, दुष्टों से नही। शिक्षा दुष्टों को नही, सज्जनों को दी जाती है। एक नीति है कि दुष्ट कभी भी हो वह दुष्ट अपना गुस्सा जो प्रथम मिलता है उस पर उतारता है सांप यदि कभी आपका पीछा करे तो आप अपने शरीर का एक कपड़ा उतार दीजिए, फेंक दीजिये, रस्ते में उस कपड़े को वो चिथड़े चिथड़े कर देगा, उसका गुस्सा शान्त हो जाएगा। सज्जन और दुर्जन की पहचान होती है। कौन सज्जन है कौन दुर्जन है इसके लिए सज्जन पुरूष जब बड़ो के द्वारा अपमान होता है तो उसे वो सम्मान मानता है। बड़ो से हारना अपमान नही है सम्मान है।आप सज्जन है या नही,आप खुद फैसला करे,कभी आपके पिताजी गाली दे दे, यदि आपको गाली बुरी लग रही है तो आप दुर्जन बेटे है और पिता ने गाली दी है, आपको यहाँ ऐसा लग रहा है कि आपको गाली नही दी है मेरा सम्मान किया है तो आप सज्जन बेटे है। जो आपके बड़े है, पूज्य होते है उनके द्वारा किया हुआ अपमान तुम्हे सम्मान लगना चाहिए तो तुम सज्जनता की कोटि में आते हो। यदि बड़ो की डांट कभी बुरी लगे तो महानुभाव आज गांठ बांध लेना तुम सबसे बड़े दुर्जन आदमी हो, तुम्हारा कल्याण नही हो सकता। दुष्ट बड़ो का अपमान बढ़ाने पर खुश होता है और स्वयं का अपमान होने पर रुस्ता है। दुष्ट की पहचान बड़ो से जब अपमान होता है तो बुरा लगता है और बड़ो का जब अपमान होता है तो अच्छा लगता है।अनजाने को, स्त्री को,बालक को,मूर्ख को कभी किमिच्छक वरदान नही दिया जाता। अपने जीवन मे संकल्प करो कि मैं सदा धर्म और धर्मात्माओ की रक्षा करूँगा क्योंकि धर्मात्माओ के बिना धर्म कंही टिकने वाला नही है। और कहा कि आज रक्षा बंधन के दिन विष्णु कुमार मुनि ने 700 मुनियों का उपसर्ग दूर किया था। एक राजा के राज्य में चार मंत्री थे, उन मंत्रीयों ने 700 मुनिराजो को बंधक बनाकर उन पर उपसर्ग किया। 700 मुनिराजों को एक जगह बिठाकर वहाँ पर अग्नि जला दी गई उधर विष्णु कुमार मुनि को अपनी रिद्धियों के द्वारा ज्ञात हुआ। इस राज्य में 700 मुनिराजों पर उपसर्ग किया गया। तब विष्णु कुमार मुनि ने वहाँ पहुँचकर 700 मुनियों का उपसर्ग दूर किया। मुनिश्री ने कहा इसलिए रक्षाबंधन पर्व को रक्षा श्रमण संस्कृति के रूप में मनाते हैं और इसलिए आज यहाँ पर 220 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा अर्ध के माध्यम से 700 श्रीफल समर्पित किये गये| इस अवसर पर शुचि पाटनी आर.के.मार्बल, ललित जैन डायमंड कारपेट, श्री शिखर चन्द जैन सिंघई परिवार को रक्षा सूत्र बाँधने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और मुनि रक्षा,मुनि रक्षक परिवार के रूप में सुषमा दीदी भोपाल को बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रों के साथ प्रांगण में उपस्थित सभी श्रावक- श्राविकाओं ने एक दूसरे को रक्षासूत्र बाँधा और मुनियों की रक्षा का संकल्प लिया।

धर्मसभा का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया|धर्मसभा में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या,मनोज जैन बाकलीवाल,नीरज जैन जिनवाणी पन्नालाल बैनारा,हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन,राजेश जैन, ललित जैन,मीडिया प्रभारी आशीष जैन मोनू,राजेश सेठी, शैलेन्द्र जैन,राहुल जैन,शुभम जैन,राकेश जैन बजाज,अमित जैन बॉबी,पंकज जैन,मुकेश जैन,समकित जैन,अनिल जैन शास्त्री,रूपेश जैन,सुभाष चन्द जैन,सचिन जैन, दिलीप कुमार जैन,सुमेरचंद जैन,अंकेश जैन, सचिन जैन,बीना बैनाड़ा,उषा मारसंस,उमा मोठया समस्त सकल जैन समाज आगरा के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
