व्यक्ति सपनों में अपने आपको जी रहा है अजीत सागर महाराज
सागर
मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने मंगल प्रवचन के द्वारा कहा कि ज्ञान प्रत्येक आत्मा के पास होता है लेकिन जिसके पास बहुत ज्ञान होता है वही सोचता है कि मैं कौन हूं।
उन्होंने आज की स्थिति पर बोलते हुए कहा कि आज की वर्तमान स्थिति यह है कि व्यक्ति सपनों में ही अपने आपको जी रहा है हकीकत कुछ और होती है व्यक्ति केवल कल्पनाओं में रात में सोते हुए शुरू करता है। कल सुबह क्या करेगा उसका पूरा जीवन इन्हीं कल्पनाओं में कट रहा है।

उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से समझाया कि जब नशा कोई भी व्यक्ति करने लगता है मैं उसका आदी सा हो जाता है। इसके विपरीत यदि उसे छोड़ने को कहा जाता है तो वह बहाना बनाता है इसके पीछे सत्यता है कि नशा एक मानसिक बीमारी ज्यादा है अपितु शारीरिक कम।महाराज श्री ने एक कहानी के माध्यम से समझाया कि दो मित्र थे इनमें से एक मित्र नशेड़ी था और दूसरा महाराज बन गया था जब वह नशेड़ी महाराज श्री के पास गया और महाराज श्री से कहा कि आपके जाने के बाद मेरे जीवन की दिशा और दशा बदल गई है। तब महाराज श्री ने कहा कि मुझे 8 दिन का समय दो तुम्हें नशे की स्थिति से बाहर निकाल देंगे। और उसने वह बात मान ली 8 दिन तक महाराज जी ने एक काले रंग की गली नशे के रूप में दी। 8 दिन की उपरांत महाराज श्री ने उससे पूछा कि अब कैसा लग रहा है। तब उसका कहना था कि आपने मुझे क्या दे दिया। तब महाराज श्री ने कहा कि मैंने तुम्हें कुछ नहीं काले रंग के मेल की अर्थात पसीने की गोली बनाकर दी थी, उसे तुमने अफीम समझा और तुमने 8 दिन तक नशा नहीं किया है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
