बाप जब गाली दे तो उसको गोली समझ लो मर्ज ठीक हो जाएगा सुधासागर महाराज
आगरा
पूज्य मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा की गुरु ने हमे स्वीकार किया है कि नहीं ये हम कैसे समझे गुरु आर्शीवाद दे रहे है इसका मतलब में नहीं कि गुरू ने हमे स्वीकार कर लिया,गुरु के आशीर्वाद से खुश मत होना, गुरू का यह स्वभाव है कि वह आर्शीवाद देवे, गुरु ने कभी हम पर क्रोध किया आर्शीवाद नही दे रहे और यदि गुरू ने हमारे ऊपर हाथ उठा दिया तो कल्याण समझो,
महाराज श्री ने कहा कि-पापी को सब पत्थर मारते है, उसी समय एक व्यक्ति आकार कहता है वो पत्थर मारे जिसने जिंदगी मे एक बार भी पाप नहीं किया हो,सभी पुण्य को चाहते हैं और करते पाप है जब पुण्य को चाहते हैं तो पुण्य करें पाप ना करें लेकिन होता पाप है बहुत कुछ बचने पर भी पाप हो ही जाता है कभी कृत से कभी कारत से कभी अनुमोदना से पाप के एक सौ आठ द्वार है कहीं से ना कहीं से पाप हो जाता है। उन्होंने कहा भगवान का अभिषेक करते करते भाव बिगड़ जातें हैं। पूजन धर्म के लिए करते हैं पुण्य की क्रिया करते हैं। और वही हम झगड़ा कर बैठते है मन्दिर में झगड़ पड़ते हैं त्यागी होकर, सबसे ज्यादा त्याग करके भी मन्दिर में झगड़ा करने लगते भाड़ वचन बोलने लगते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि दुनिया मे जो कोई भी है उसका कोई न कोई उपकार जरुर है वस्तु जिसका कोई न कोई उपयोग दुनिया में है सुगंध-दुर्गंध, अच्छी वस्तु बुरी वस्तु सभी में उपकार है।-ज्ञानी ज्ञेय दृष्टी से देखता है सांप को अपनी दृष्टी से मत देखों,सांप की दृष्टी से देखो ज्ञेय दृष्टी पर दृष्टी है। ज्ञेय दृष्टी आदमी को धर्मातमा बनाती है व आत्मा का विषय पहले नहीं होता है बहुत बाद में आत्मा का विषय बनता है।सम्यक दर्शन की पहली दृष्टी ज्ञेय दृष्टी हैं.पर को पर रूप जानों जानता हुआ भी व्यक्ति गलत कर रहा है व्यक्ति जानता हैं, फिर भी गलत कर रहा है।

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उन्होंने एक बात और कि डॉक्टर हमें जब गोली देता है तो हमारा मर्ज ठीक हो जाता है। उसी प्रकार बाप अगर गाली दे तो उसे गोली समझ कर खा लेना आपका मर्ज ठीक हो जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
