मेवाड़ प्रांत के बोराव ग्राम के धर्मनिष्ट ठग परिवार को मिला आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की आहार चर्या व चरण वंदना का लाभ

धर्म

मेवाड़ प्रांत के बोराव ग्राम के धर्मनिष्ट ठग परिवार को मिला आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की आहार चर्या व चरण वंदना का लाभ

डोंगरगढ़
छत्तीसगढ़ का पावन क्षेत्र चंद्रोदय तीर्थ डोंगरगढ़ इन दिनों एक पावन तीर्थ बना हुआ है जहां विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का पावन वर्षा योग हो रहा है।

 

 

 

 

जहां दूरदराज के लोग गुरु चरणों में समर्पित होकर भक्ति भाव के साथ आ रहे हैं वही लगभग 1100 किलोमीटर दूर से राजस्थान राज्य के चित्तौड़गढ़ जिले के बोराव ग्राम के धर्मनिष्ट श्रावक परिवार प्रभु लाल ज्ञानचंद ठग परिवार के लगभग 40 से 50 व्यक्तियों ने लगभग 1 माह तक गुरु चरणों में समर्पित किया और गुरुवार की पावन बेला में उन्हें गुरु चरणों की सन्निधि और उनकी आहार चर्या का पुण्य लाभ प्राप्त हुआ।

 

इसी परिवार के वरिष्ठ जन श्रीमान प्रभुलाल,ज्ञानचंद, कैलाशचंद, चांदमल, सूरजमल, विमल कुमार निर्मल कुमार, आदिकुमार, महावीर कुमार जैन ठग परिवार आज खुशी से फूला नहीं समा रहा था। उनके चेहरे की खुशी साफ झलक रही थी और जैसे ही पूज्य गुरुदेव की आहारचर्या निरंतराय संपन्न हुई तो उनकी आंखें खुशी से नम थी। ऐसी हर्षदायक सूचना सुनकर संपूर्ण मेवाड़ प्रांत में एवं बोराव ग्राम में खुशी की लहर दौड़ गई और सभी ने इसकी बारंबार अनुमोदना की। और इस परिवार को बधाई एवं अनुमोदना करने का लोगों का ता ता सा लग गया।।

               

इनके परिवार के अनंत जन्मों का पुण्य उदय में आया उनके परिवार ने वर्ष 2017 के पूज्य मुनि श्री 108 विनीत सागर महाराज एवं पूज्य मुनि श्री 108 चंद्रप्रभ सागर महाराज के बोराव चतुर्मास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी जो संपूर्ण भारतवर्ष में एक अपनी अमिट छाप छोड़ गया और बोराव समाज और यहा की भक्ति संपूर्ण भारत वर्ष में एक प्रेरणास्पद उदाहरण बनी।

 

इन्हीं के परिवार के श्रीमान अनिल मैना ठग को वर्ष 2017 के विनीत सागर महाराज के चतुर्मास में पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का अवसर मिला था ।

 

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इतना ही नहीं मुनि श्री चंद्रप्रभ सागर महाराज की पिच्छिका भी इन्हीं के ही परिवार के श्रीमान पवन कुमार जया जैन को प्राप्त हुई थी। नियम संकल्प के साथ धर्म और समाज सेवा से जुड़े रहना इस परिवार की विशेषता है जो आज अनंत जन्मों के पुण्य के साथ परिलक्षित हो गई।

लगभग 1 माह तक गुरु चरणों में सेवा करना और वह भी इतने दूर रहकर यह अपने आप में एक अद्भुत है। चंद्र गिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में इनके परिवार द्वारा चातुर्मास के मंगल कलश के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए प्रतिभास्थली में पढ़ रही अंचल की बेटियों के अध्ययन करवाने का भी पुण्य लाभ प्राप्त किया।

साभार :

शांति विद्या प्रभावना संघ

संतोष पांगळ जैन, मुरुड

 

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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