राजस्थान सरकार द्वारा जारी जैन संस्कृति बोर्ड बनने से जैन बंधुओ को क्या फायदे

राज्य

राजस्थान सरकार द्वारा जारी जैन संस्कृति बोर्ड बनने से जैन बंधुओ को क्या फायदे

जयपुर

राजस्थान सरकार के द्वारा जारी जैन श्रमण संस्कृति बोर्ड की स्थापना की गयी है इसकी स्थापना मे राजस्थान सरकार द्वारा जैन समुदाय के मंदिर, पुरातात्विक धरोहरों के सरक्षणं एवं नव निर्माण,जैन समुदाय के लोक साहित्य एवं ग्रंथों के प्रकाशन, प्रचार-प्रसार इनके प्राचीन साहित्यों के संकलन,शोध एवं सरंक्षण तथा जैन धर्म श्रमण परंम्पराओं के सरक्षण के सम्बन्ध में सुझाव देने हेतु राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड का गठन किया गया है।

इसका स्वरुप

राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्डका गठन मे गैर सरकारी सदस्य – 5 जो निम्न प्रकार होगे :-अध्यक्ष एक,उपाध्यक्ष एक, सदस्य तीन पदों का मनोनयन राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड के नियमों के अन्तर्गत किया जायेग :- इस बोर्ड में निम्नलिखित सरकारी सदस्य होंगे

शासन सचिव, गृह विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि (संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी)

शासन सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग (प्रारम्भिक / माध्यमिक) एवं संस्कृत शिक्षा विभाग अथवा उनकाप्रतिनिधि (संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी)आयुक्त / निदेशक, कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरात्तव विभाग उनका प्रतिनिधि।आयुक्त / निदेशक, देवस्थान विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि।आयुक्त / निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अथवा उनका प्रतिनिधि।

आयुक्त / निदेशक, अंहिसा एवं शांति विभाग अथवा उनका प्रतिनिधिआयुक्त / निदेशक अल्पसंख्यक मामलात विभाग अथवा उनका प्रतिनिधिउप निदेशक स्तर का विभागीय अधिकारी (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग), राजस्थानराज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड सचिव

 

 

 

 

 

 

श्रमण संस्कृति बोर्ड का उद्देश्य

जैन धर्म श्रमण परंम्पराओं के संबंध में राज्य सरकार को सुझाव देना ।जैन समुदाय के लोगों के कल्याण हेतु इस समाज के लिये विभिन्न योजनाऐ प्रस्तावितकरने एवं उनके प्रचार प्रसार के संबंध में राज्य सरकार को सुझाव देना । जैन समुदाय पर आधारित पुरातात्विक धरोहरों एवं मंदिरो का संरक्षण एवं नव निर्माण के संबंधमें राज्य सरकार को सुझाव देना । जैन समुदाय के प्राचीन साहित्य का संकलन, संरक्षण एवं शोध कार्य पर राज्य सरकार को सुझाव देना । जैन समुदाय के अराध्य 24 तीर्थंकर पर रचे गये लोक साहित्य का प्रकाशन व प्रचार प्रसारकरना।. जैन समुदाय के अराध्य भगवान महावीर के शांति एवं अंहिसा के सिद्धातों का प्रचार प्रसार करना। जैन समुदाय के आचार्य-संतो एवं साध्वियों और श्रावक विकाओं को भ्रमणदौरान कानूनी संरक्षण प्रदान करने का सुझाव राज्य उप निदेशक स्तर का विभागीय अधिकारी (समाज कल्याण सेवा संवर्ग सामाजिक न्याय एवंअधिकारिता विभाग), बोर्ड के सचिव के पद का कार्य करेगे। उक्त बोर्ड के कार्य संचालन केलिए अलग से नवीन पदों का सृजन एवं स्वीकृत किये जायेगें।

सेवा-शर्तें :-

राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड की सेवा शर्तें इस बोर्ड के लिये निर्मित नियमों के अनुसारहोगी।

मार्गदर्शन की कार्य पद्ति

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजस्थान सरकार, राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्डके लिये प्रशासनिक विभाग होगा।

कार्यक्षेत्र।

राजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राजस्थान राज्य होगा। तथा इस बोर्ड

के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार को कार्य योजना एवं सुझाव प्रस्तावित करेगा।

छराजस्थान राज्य श्रमण संस्कृति बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों की योग्यता, वेतन भत्ते, कार्यकाल

तथा अन्य सुविधाओं के सम्बन्ध में राज्य सरकार जो भी निर्धारित करेगी, देय होगें।

 

 

 

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