जहा हिंसक जानवर को पाला जाता हैं वहां मुनिराजो को आहार नही करना चाहिए अजीत सागर महाराज

धर्म

जहा हिंसक जानवर को पाला जाता हैं वहां मुनिराजो को आहार नही करना चाहिए अजीत सागर महाराज
सागर
भाग्योदय तीर्थ परिसर में पूज्य मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने मोकामा की महाकाव्य पर अपने प्रवचन देते हुए कहा कि अतिथि के सम्मान करने वाले व्यक्ति को हर जगह सम्मान प्राप्त होता है। यदि आप अतिथि का सम्मान नहीं करते हैं तो आपके वहां जाने पर आपका भी वहां सम्मान नहीं होगा। करुणा के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी के दुखों और पीड़ा को देखकर उसे दूर करना करुणा है। किसी को दुख देना करुणा नहीं होती है।

 

 

 

वर्तमान की दशा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ 10 साल पूर्व घरों के अंदर गायों को स्थान होता था जिसका यह है प्रभाव था कि घरों में विपत्तियां दूर होती थी। आज गायों को बेसहारा सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। घरों में कुत्ता बिल्ली जैसे हिंसक पशुओं का पालन हो रहा है। जो कि गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन घरों में मांसाहारी पशुओं का पालन होता है वहां मुनिराजो को आहार नहीं करना चाहिए।

 

 

आगे अपने विचार रखते हुए महाराज श्री ने कहा कि जब हम जमीन पर चलते हैं तो नीचे देख कर चलना चाहिए इसके द्वारा हिंसा से बचा जा सकता है। एक उदाहरण के माध्यम से महाराज श्री ने समझा कि जैसे की कील पत्थर आदि देखकर आप चलते हैं और गिरने से बचते है, हरी घास पर चलते हैं तो उसमें भी हिंसा होती है। मुनिराज उस मार्ग पर चलते हैं जिस पर हरी घास ना हो। उन्होंने महिलाओं को काले कपड़े नहा पहनने की सलाह दी काले कपड़े यदि नहीं पहने जाएं तो वह मांगलिक होता है शादी ब्याह वह मांगलिक कार्य में भी में भी काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। महाराज श्री ने नारी का श्रृंगार साड़ी को बताते हुए कहा कि साड़ी भारतीय नारी की पहचान है। लेकिन जो पहचान हमारी है हम उसे खो रहे हैं। बाहर निकलकर जींस पहनना उत्तम संस्कृति नहीं है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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