1008 श्री चंद्रप्रभ भगवान सिद्ध क्षेत्र सोनागिर सिद्ध क्षेत्र मध्य प्रदेश में भव्य सिद्धचक्र मंडल विधान आयोजित 2 जुलाई को होगी 2 दीक्षा

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1008 श्री चंद्रप्रभ भगवान सिद्ध क्षेत्र सोनागिर सिद्ध क्षेत्र मध्य प्रदेश में भव्य सिद्धचक्र मंडल विधान आयोजित 2 जुलाई को होगी 2 दीक्षा
सोनागिर
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल अक्षुण्ण बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी संघ सहित सिद्ध क्षेत्र सोनागिर विराजित हैं।इनके सानिध्य में दीक्षार्थी 7 प्रतिमा धारी तारादेवी उकावत तथा श्रीमती सुनीता देवी छाबड़ा गोहाटी परिवार द्वारा सिद्ध चक्र महा मंडल विधान आयोजित किया जा रहा है।30 जून को 512 अर्ध्य समर्पित किए गए।

 

 

 

 

मुनि श्री पुण्य सागर जी द्वारा 2 जुलाई 2023 को जैनेश्वरी दीक्षा दी जावेगी। बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी बिगुल अनुसार मुनि श्री ने बताया कि आज

अरिहंत,सिद्ध,आचार्य,उपाध्याय,साधु परमेष्ठि को अर्घ्य समर्पित किए गए। सिद्ध बनने के पूर्व,अरिहंत साधु परमेष्ठि पुरुषार्थ कर बन सकते हैं। वर्तमान में विदेह क्षेत्र से मोक्ष जा सकते हैं।
राजेश पंचोलिया इंदौरअनुसार आचार्य परमेष्ठी का गुण अनुवाद करते हुए मुनि श्री पुण्य सागर जी ने बताया कि आचार्य ज्ञान ,शिक्षा, दीक्षा देते हैं अनेक गुण के धारी होते हैं । हित मित्, प्रिय वाणी का उपयोग करते हैं ।आचार्य परमेष्ठी नारियल के समान होते हैं बाहर से कठोर किंतु भीतर से हृदय से नरम होते हैं ।आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा में वर्तमान में पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आचार्य शांतिसागर जी की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उनके सानिध्य में वर्ष 2024 में आचार्य शताब्दी महोत्सव देश भर में मनाया जाएगा ।आचार्य श्री शांति सागर जी ने सोनागिर क्षेत्र में भी मुनि दीक्षा दी है ।आचार्य श्री शांतिसागर जी ने दक्षिण भारत से उत्तर भारत भ्रमण कर धर्म प्रभावना की। जिन स्थानों पर साधुओं का प्रवेश निषेध था वहां उन स्थानों पर भी उन्होंने सिंह वृति धारण कर सभी और बिहार किया। वर्तमान में साधु आचार्य शांतिसागर जी की देन है उन्होंने दीक्षा गुरु को दीक्षा दी इसलिए वह गुरु नाम गुरु कहलाते हैं।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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