मुनि श्री विमल सागर महाराज आदि पंच ऋषि राज का बागीदौरा में हुआ मंगल आगमन समाज जन द्वारा वर्षा योग 2023 हेतु श्रीफल भेंट

धर्म

मुनि श्री विमल सागर महाराज आदि पंच ऋषि राज का बागीदौरा में हुआ मंगल आगमन समाज जन द्वारा वर्षा योग 2023 हेतु श्रीफल भेंट
बागीदौरा
नगर में शुक्रवार की बेला में पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री विमल सागर महाराज आदि पंच ऋषि राज का मंगल आगमन हुआ। पूज्य मुनि संघ का शुक्रवार की प्रातः बेला में राखी से मंगल विहार हुआ पूज्य संघ की अगवानी हेतु भक्तों का समूह डेढ़ किलोमीटर पूर्व वडलीपाड़ा मोड़ पर पहुंच गए जहां पूज्य मुनि संघ की भव्य अगवानी की गई। मदर के प्रमुख मार्गों से होते हुए भव्य जुलूस के रूप में आगे धर्म ध्वजा लहराते हुए अश्वराही बालक चल रहे थे। इतना उत्साह इस भव्य अगवानी शोभायात्रा में था पाठशाला के बच्चे साफा बांधे चल रहे थे। इसी के साथ डांडिया नृत्य करती हुई बालिका, लेजिम नृत्य दिव्य घोष करती हुई महिलाएं आकर्षक का केंद्र बिंदु रही।

 

 

 

 

 

 

शाही साफा बांधे नवयुक मंडल के युवा कार्यकर्ता गांधी टोपी पहने सभी बुजुर्ग महिलाएं अनुशासित कदमों के साथ कतार बद्ध होकर मुनि संघ के आगे चल रहे थे। भक्तिमय भजनों पर युवा जमकर झूम रहे थे। मुनि चंकी अगवानी में 51 स्वागत द्वार लगाए गए थे। जगह जगह भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा था। जगह-जगह मुनि संघ का पद प्रक्षालन एवं मंगल आरती की गई। यह भव्य शोभायात्रा दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। जहां पूज्य मुनि संघ ने 700 वर्ष प्राचीन मूलनायक शांतिनाथ भगवान के दर्शन किए वह जिनालय के दर्शन किए। पूज्य मुनि संघ प्रतिमा जी की आभा को देख अभिभूत हुए। बाद में यह शोभायात्रा धर्म सभा में परिवर्तित हो गई। सभी समाज जनों ने पूज्य मुनि संघ को 2023 वर्षा योग हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का भक्तिमय पूजन भी किया गया।


मनुष्य जीवन में संयम धारण करें मुनि श्री विमल सागर महाराज
इन मांगलिक पलों में पूज्य मुनि श्री ने धर्म सभा को संबोधित किया और समाज को वह भक्तों को जागृत करते हुए कहा कि संयम से मनुष्य क्षीर, गंभीर बनता है। और निर्णय लेने में कोई गलती नहीं करता है। मनुष्य के स्वाभाविक विकास भी इससे दूर होते हैं।

उन्होंने कहा कि धर्म के पालन में स्थिर बुद्धि का संचालन होता है। संयम से ईर्ष्या, द्वेष, लोभ, मोह क्रोध का भी शमन हो सकता है। जीवन एक अवसर है इसमें पाप छोड़कर धर्म को जोड़ना होगा। पूज्यश्री ने भानगढ़ की धर्म धरा का केंद्र बिंदु बागीदौरा को बताते हुए कहा कि धर्म धरा का केंद्र बिंदु है। लेकिन केंद्र के साथ अन्य गांव भी वृत्त के व्यास की परिधि में शामिल है। दान, उपवास, पूजा भक्ति संपदा है। वांगड़ भक्ति शक्ति के साथ मुक्ति का संगम है। आधुनिक युग में धर्म की प्रभावना से ही जीवन में पाप का क्षय हो सकता है। जब आप दूर तो मनुष्य जीवन जीना सार्थक हो जाएगा। भक्ति की शक्ति से भगवान प्रकट हो जाते हैं। अवसर जब आता है दबे पांव आता है। और पंखे लगाकर उड़ जाता है। उन्होंने अंत में कहा कि इसीलिए अवसर का लाभ देव, शास्त्र, गुरु की भक्ति जरिए आध्यात्मिक की राह पर चलकर उठाए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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