पुण्य के उदय आया तो है तो सुख अवश्य मिलेगा-आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ
एक व्यक्ति ज्वर से ग्रसित हैं ज्वर के कारण वह अस्वस्थ हो गया उसको नापा भी नहीं गया ज्वर आया है कई दिनों से आया है उसे बुखार के संबंध में कुछ भी ज्ञात नहीं है परिवार घबरा रहा है, एक व्यक्ति ने कहा कि इसका प्रतिकार तो है लेकिन इसके लिए औषधि को विधि पूर्वक लेना होगा उसे औषधि दी गई और अच्छे से कम्बल आदि ओढ़ा दिया गया। बुखार तो नहीं है,किन्तु पसीना काफी मात्र में आया। और उसी के साथ बुखार गायब हो गया। शरीर के पास दो प्रकृति रहती है पुण्य प्रकृति और पाप प्रकृति । पुण्य का उदय आता है तो सुख मिलता है पाप के उदय में उसे दुःख भोगना पड़ता है।
यह मंगल उद्बोधन चंद्रोदय तीर्थ डोंगरगढ़ में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने व्यक्त किए।
आचार्य श्री ने कहा जीव मात्र के प्रति करुणा का भाव रखें जो व्यक्ति रास्ता जानते हैं वे सदुपयोग कर रहे हैं। इस प्रकार जिनको संयम का ध्यान हो गया उनको ना सर्दी पास आयेंगी न वुखार आयेगा।
हम तो बच गये और को बचना ही हमारा धर्म है।जिसे औषधि का ज्ञान हो गया है उसे दूसरों को बचाने के लिए पुरूषार्थ करना चाहिए। भगवान महावीर स्वामी ने इसीलिए तो सूत्र दिया है परस्परोग्रहों जीवानाम हम एक दूसरे के प्रति उपकार का भाव रखें जीव मात्र के प्रति करुणा भाव रखें ये अपने आप पर बहुत बड़ी उपकार होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
