मुनि श्री 108 वीरसागर महाराज के 12जून को पैठण आगमन की संभावना
पैठन
संत शिरोमणी आचार्यश्री 108 विद्यासागर महामुनिराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री वीरसागर मुनिराज (4 मुनि 5 क्षुल्लक) के मंगल विहार अंबड़,जिला-जालना, महाराष्ट्र से श्रीक्षेत्र पैठण की ओर चल रहा है।संभावना व्यक्त की जा रही है,मुनिसंघ का आगमन 12 जून तक पैठण में होने की संभावना हैं।
पैठन का इतिहास
हमने अक्सर देखा है की मन्दिरों में प्रतिमायें पाषण या धातुओं की विराजित होती है
यदि बालू रेती से निर्मित प्रतिमा के दर्शन को लालायित है तो महाराष्ट्र् राज्य के औरंगबाद जिले में औरंगबाद शहर के दक्षिण में लगभग 50 किमी की दूरी पर गोदवारी नदी के उत्तरी तट पर बने श्री 1008 जैन मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, पैठन के दर्शन कीजिये
यदि हम इस प्रतिमा के विषय मे और उसके बारे मे जाने तो क्षेत्र पर मूलनायक प्रतिमा 20 वे तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ भगवान की है, जो पद्मास में है, यह जिनप्रतिमा साढे तीन फुट की है।
यह प्रतिमा अपने आप मे अलोकिक है विशेष बात यह है की यह मूल नायक प्रतिमा रेत से बनी हुई है,जिसे लोकमातनुसार राजा खरदूषण द्धारा बनवाया गया है ऐसा उल्लेख मिलता है इसकी प्राचीनता का प्रमाण इस बात से मिलता है की यह प्रतिमा चतुर्थ काली है। क्षेत्र में मूल नायक प्रतिमाए एवम अन्य प्रतिमायें भी है ।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
