मनुष्य जीवन प्राप्त कर जो सम्यक पुरुषार्थ करता है वह अपने भाग्य को संवार कर सौभाग्य में बदल लेता है आचार्य विमर्शसागर
जतारा
पूज्य आचार्य श्री 108 विमर्श सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कागज पर आप जो लिखेंगे वही अंकित होगा, उसी प्रकार जीवन में आप जैसा करेंगे वैसा प्रतिफल मिलेगा।
उदाहरण के माध्यम से बताया कि परीक्षा में कॉपी कोरी प्राप्त होती है, आप अच्छा लिख रहे हैं तो आप अपने भाग्य को सौभाग्य में बदल रहे हैं और यदि आप अपनी कलम से उस पर गालियां लिख रहे हैं, तो उसे खराब कर रहे हैं तो आप स्वयं
ही अपने भाग्य को दुर्भाग्य में बदल रहे है।
उन्होंने आगे कहा की इस जीवन में मात्र वचन वर्गणाएं मिली हैं अब ये आपकापुरुषार्थ है कि आप अपने मीठे वचनों से उन वचन वर्गणात्रों कोसार्थक कर रहे हैं या दुर्वचनों या गालियों द्वारा उन्हें बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन प्राप्त कर जो सम्यक पुरुषार्थ करता है वह अपने भाग्य को संवार कर सौभाग्य में बदल लेता है और जो खोटा पुरुषार्थ करता है वह अपनेभाग्य को दुर्भाग्य में बदल लेता है। मनुष्य जीवन में व्यक्ति को सभी योग्यताएं प्राप्त हैं लेकिन व्यक्ति खुद ही अपनी योग्यताओं के साथ न्याय नहीं करता है। मनुष्य को
अच्छे वचन बोलने, मन के द्वारा अच्छा,, श्रेष्ठ, चिंतन- विचार करनेकी योग्यता है तो शुभ और श्रेष्ठकर सकता है। ओर अपने भाग्य को सौभाग्य मेंबदल सकता है लेकिन अपने मन वचन और शरीर को दुष्कर्मों मेंलगाकर व्यक्ति अपने भाग्य को
दुर्भाग्य में परिवर्तित करता रहता है।आपको लगता है कि यह व्यक्तिगलत है, ठीक है वह व्यक्ति गलतहै लेकिन आप उसका कभी बुरा नसोचे, कभी उसका बुरा न करें औरअपने परिणामों को अच्छा रखें,कभी किसी का अहित न विचारें।आप सबके प्रति अच्छे विचारलाकर अपना ही हित कर रहे है, येआप स्वयं के साथ न्याय कर रहे हैं।
पूज्य श्री ने कहा यदि आप अगर किसी का अहित विचारते हैं तो आप स्वयं का ही अहित कर रहे हैं यह आपका स्वयं के साथ अन्याय है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
