असि, मसि ,कृषि, वाणिज्य, विद्या, शिल्प के प्रदाता थे भगवान आदिनाथ -आचार्य सुनील सागर महाराज
गींगला।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने प्रजा को असि (शस्त्र विद्या) मसि (आजीविका) कृषि, वाणिज्य (व्यापार), विद्या, शिल्प आदि षट कर्मों की शिक्षा दी । भगवान आदिनाथ बेटा और बेटी में समानता के पक्षधर थे । उन्होंने भरत बाहुबली जैसे तेजस्वी पुत्रों के साथ ब्राह्मी सुंदरी जैसी प्रज्ञावान पुत्रियों को भी शिक्षा ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ाकर प्राणी मात्र को बेटा बेटी में भेदभाव नहीं करने का अच्छा संदेश दिया । नीलांजना अप्सरा के नृत्य करते हुए अकाल मरण दृश्य को देखकर आदिनाथ ने वैराग्य पथ को अंगीकार करते हुए दीक्षा को स्वीकार कर संपूर्ण वैभव का त्याग कर दिया। उक्त उद्गार गिंगला में भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य सुनील सागर महाराज ने व्यक्त किए। भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष में प्रातः श्रीजी का अभिषेक और शांति धारा हुई। भगवान आदिनाथ निर्वाण कल्याण के उपलक्ष में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। धर्म सभा के दौरान आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट की गई । कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य महावीर जैन ने किया। इस अवसर पर लक्ष्मी लाल बंबोरिया झमक शेरावत कालू पंडेत पंकज मालवी दिनेश सोमावत पारस कोठारी विनोद बम्बोरिया सहित जैन समाज के श्रावक मौजूद थे। केशलोचन हुआ प्रवक्ता अनिल स्वर्णकार ने बताया कि धर्म सभा के पूर्व मे आचार्य सुनील सागरजी महाराज के संघ के मुनि संविज्ञसागर ,मुनि सम्पूज्य सागर, क्षुल्लक संकल्प सागर महाराज, आर्यिका आराध्यमति माताजी , आर्यिका सुदृढ़ मति माताजी के केश लोचन संपन्न हुए । संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
