एक गुणी का अनादर करना सभी गुणियों का अनादर करना है कनकनंदी
सागवाड़ा
कलिकाल संमतभद्र आचार्य कनकनंदी ससंघ का खोडनिया परिवार द्वारा ग्रीष्मकालीन प्रवास योगेंद्र गिरि पर हो रहा है। वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया कि एक साधु, एक गुणी का अनादर करना सभी गुणियों का अनादर करना है।
इसका उदाहरण देते हुए बताया की जिस प्रकार एक फल पकने पर अन्य फल भी पक जाते हैं एक फल सड़ जाने पर अन्य भी सड जाते हैं। संपूर्ण पापों का मूल जीव जीव के प्रति भेदभाव है। किसी के साथ भी दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। गुणो का अनादर ही घोर पाप है। भगवान का दर्शन करते समय शरीर के हाव भाव में भी शालीनता होनी चाहिए तथा मन वचन काया में सरलता होनी चाहिए दूसरों को दिखाते हुए प्रदर्शन करते हुए धर्म नहीं होता है।
उन्होंने कहा प्रदर्शन में नहीं आत्मा दर्शन में धर्म है। आचार्य श्री ने कहा की हर कार्य प्रदर्शन के लिए करते हो थोड़ा आत्म दर्शन से तो करो। भगवान के गुरु के पीठ पीछे नहीं सामने आकर के विनय से वंदना स्तुति पूजा आदि करना चाहिए पीठ दिखाते हुए नहीं करना चाहिए। संघ रुष्ट हो जाएगा ऐसा समझ करके संघ की सेवा करना भी दोष हैं। वचन से आचार्य आदि का तिरस्कार करता है तो वह हिलित दोष है। वचन से व्यवहार से हिलाना डुलाना चंचल करना डिस्टर्ब करना क्षुभित करना हिलित दोष है।
पूज्य श्री ने कहा धर्म विश्वास से होता है विवशता से नहीं। धर्म स्वप्रेरणा से होता है। धर्म जीव का स्वभाव है। राष्ट्र के लिए टैक्स देना आदिनाथ भगवान ने सामाजिक व्यवस्था के लिए चतुर्थ काल से प्रारंभ किया था। धर्म समस्त शंका से रहित निशंक अव्याबाध सरल सहज व्यापक सुक्ष्म होता है। धर्म मे दबाव बंधन नहीं चलेगा। सामाजिक व्यवस्था अलग होती है धार्मिक व्यवस्था अलग है। स्वेच्छा से दान देने पर अनंत पुण्य लगेगा। पुरस्कार नहीं देने पर गुरु का तिरस्कार करना भी दोष है। शब्द हीन वाक्यहीन जल्दी-जल्दी करके उच्चारण में दोष लगाना काल का दोष आदि हीन दोष है।

धार्मिक हर क्रिया व्यवस्थित पूर्णता से करना चाहिए उसको अपूर्ण अव्यवस्थित करना दोष है क्रमबद्ध सुव्यवस्थित अन्य कार्य में मन लगता है वैसे धर्म में लगना चाहिए। वर्तमान में सभी चलते चलते व्यापार करते-करते धुली लगती है वैसे धर्म करना चाहते हैं। मंत्र में शब्द कम है तो वह भी गुणकारी नहीं है।
विजयलक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
