- जिसके अंदर बचपन से धर्म के संस्कार होते हैं उनके विचार अंत समय तक शुभ बने रहते हैं संकल्प सागर महाराज
विदिशा
पूज्य मुनि श्री 108 संकल्प सागर महाराज ने अरिहंत विहार में धर्म सभा को संबोधित करते हुए धर्म का पालन बचपन से ही करने की सीख देते हुए बताया कि जीव अकेला ही जन्म लेता है और अकेला ही अपने कर्मों का फल भोगता है। यह जीव मिथ्यात्व के कारण संसार में भटकता रहता है।
धर्म का पालन 55 में नहीं बचपन से ही करने की सीख देते हुए पूज्यश्री ने कहा कि धर्म को बचपन से ही करना चाहिए। इस पर विशेष प्रकार डालते हुए कहां की जिनके संस्कार बचपन से ही धर्म के होते हैं। उनके विचार जीवन के अंत समय में भी शुभ बने रहते हैं। एवं उनकी समाधि निश्चित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि हर मनुष्य के जीवन में शुभ के भाव सदा बने रहै।

पूज्यश्री ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि हमारे जीवन में सदा अशुभ कर्मों का भाव चलता ही रहता है। उन्होंने कहा कि उल्टे विचारों से उल्टे ही कार्य होते हैं।।

और शुभ विचारों से शुभ कार्य होते हैं। उन्होंने हिंसा का व्यापार करने वालों के विषय में कहा कि ऐसे लोगों का उसी पर्याय में जन्म लेकर नरको के दुखों को भोगना पड़ता है। उन्होंने इंसानियत की पहचान को बताया कि वाणी द्वारा ही इंसानियत की पहचान हो जाती है। अच्छे विचार ही शांति के कारण होते हैं। पूरे विचार अशांति के कारण होते है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
