मुनि श्री विनम्रसागर महाराज ने बंधा अतिशय क्षेत्र के बारे में बताया
बंधाजी
बुंदेलखंड के प्राचीन तीर्थों में एक अतिशय क्षेत्र बंधाजी में पूज्य मुनि श्री 108 विनम्र सागर महाराज सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव शुरू हुआ।
प्रातः कालीन बेला में मुनि श्री के सानिध्य में अभिषेक नित्य नियम पूजन संपन्न हुई। अभिषेक क्रिया संपन्न होने के बाद पूज्य मुनि श्री ने अतिशय क्षेत्र के बारे में रोचक जानकारी सभी को बताई। उन्होंने बोलते हुए कहा कि हम जब भी बिहार करते हैं तो कई स्थलों को मंदिरों के दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है।
उन मंदिरों जिनालय के जब हम दर्शन करते हैं तब 500 से हजारों साल तक की प्राचीन प्रतिमाएं मिलती हैं। उन्होंने अतिशय क्षेत्र बंधाजी के विषय में कई जानकारियां सभी के सामने रखी उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के जो अजीतनाथ भगवान हैं वह चेत्र सुदी 13 संवत 1199 की प्रतिष्ठित प्रतिमा है। अजीतनाथ भगवान की मूर्ति का रंग श्याम वर्ण का है। और यह पद्मासन मुद्रा में विराजित है।

उन्होंने भगवान अजीतनाथ के विषय में बोलते हुए कहा कि जो भी भगवान अजीतनाथ के चरणों का स्पर्श करता है या उनके दर्शन करता है। तो उसे कई अनुष्ठान करने का पुण्य लाभ होता है।
विशेष बोलते हुए मुनि श्री ने कहा कि यह पवित्र क्षेत्र अद्भुत है, जैन धर्म जैन धर्म की पवित्रता आप अपने अंतरंग के चक्षु को खोलकर देखिए। जैन दर्शन के विषय में बोलते हुए कहा कि जैन सिद्धांत कहता है कि जैसा व्यक्ति कर्म करता है। वैसा ही फल भोक्ता है।

जैन सिद्धांत पर चलने वाला व्यक्ति पूछता है की, जब कर्म अनुसार गति मिलती है तो मंदिर में इस तरह के अनुष्ठान करने से क्या हमारे घर में बदल जाएंगे क्या हमारे कर्म में परिवर्तन आ जाएगा। उन्होंने कहा कि सिद्धांत में पड़े हुए लोग भक्ति की भाषा नहीं जानते। जैन मंदिरों में किया जाने वाला पुरुषार्थ पाप की प्रवृत्तियों को बदलकर पुण्य में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
