गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अपने आप को गिरा हुआ महसूस करते हैं जो विसंगति है विनम्र सागर महाराज
नौगांव
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ने भारतीय संस्कार पर प्रकाश डाला उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों ने भारत में अपनी शिक्षा को बढ़ाने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि आज के बच्चे गुरुकुल प्रतिभास्थली को छोड़कर कान्वेंट स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ते हैं।पढ़ते हैं। और उनके माता-पिता अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं।
पूज्यश्री ने कॉन्वेंट स्कूल का अर्थ बताते हुए कहा कि इसका अर्थ होता है। अनाथालय पहले बच्चों को गुरुकुल में छोड़ दिया जाता था। पहला काग चेष्टा इसका अर्थ है कौवा कभी अकेला नहीं खाता। भगत ध्यान बगुला। कहीं भी देखता हूं दृष्टि एकाग्र रहती है। तीसरा मुद्रास्वान इसका अर्थ है सो भी रहा हो तो कान जागृत रहते हैं। चौथा अल्पाहारी सुबह गिर गाय का दूध, हलका नाश्ता, हल्का भोजन जिससे विद्यार्थियों को आलस ना आए। पांचवा गृह त्यागी घर छोड़कर बच्चा अनुशासन में रहता है, संस्कार में रहता है, समय का पाबंद रहता है। घर पर बालक स्वतंत्र रहता है।


उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब लोग गुरुकुल छोड़ कॉन्वेंट जा रहे हैं उन्हें गुरुकुल और कान्वेंट का अर्थी नहीं मालूम है। गुरुकुल पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुकुल शिक्षा का एक बहुत अच्छा स्थान है। जबकि एक कान्वेंट अनाथालय के रूप में संचालित है। लेकिन कान्वेंट में पढ़ाने वाले अभिभावक अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं। और गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अपने आप को गिरा हुआ महसूस करते हैं। यह विसंगति आज हमारे समाज में फैली हुई है। उसको हमें सुधारना है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
