संगठित होकर समाज कार्य करने पर सफलता मिलेगी–मुनि पुगंव सुधासागर महाराज

धर्म

संगठित होकर समाज कार्य करने पर सफलता मिलेगी–मुनि पुगंव सुधासागर महाराज
टीकमगढ़–

जैनियों को संगठित होकर कार्य करना पड़ेगा राजनैतिक संगठनों को इतना भय हो जाये कि जैनी किसी प्रत्याशी को जिता नहीं सकते लेकिन हरा तो सकते। आपके अंदर किसी को भी हराने की क्षमता है। आज के समय में ये ही बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसको तब ही सम्भव मानना जब आप संगठित होकर रहेंगे

आज प्रभु राज व्यवस्था संभालने जा रहे हैं। तो ये बात कर लेते है संगठन में शक्ति ।है इसको समझ कर क्रियान्वयन करना होगा।संसार में यदि जीना है तो संगठन बनाना ही पड़ेगा। भाई जैसा मीत नहीं।विश्वास करना पड़ेगा। आज रिषभ देव राज गद्दी संभाल रहे हैं उनकी हम गद्दी सुरक्षित नहीं रख पाये। आज हिंसक लोग सत्ता तक पहुंचाने में कामयाब हो रहें हैं।

 

यह उद्गार शहर की नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथधाम का श्री मद् जिनेन्द्र त्रिकाल चौबीस पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में तीसरा दिन तप ल्याणक की विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज ने व्यक्त किए। प्रातः काल कि बेला से मंगलाष्टक रक्षा मंत्र श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा एवं नित्यम पूजन प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भइया द्वारा संपन्न कराई गई।

स्यादवाद धर्म नहीं एक दृष्टि कोण है
मुनि पुंगव ने अपने प्रवचन में कहा कि स्यादवाद धर्म नहीं होता एक दृष्टिकोण है। स्यादवाद द्रव नहीं है अनेकांत धर्म है। स्यादवाद धर्म की अभिव्यक्ति करने का साधन है। मुनि श्री ने कहा कि जो देखने में नहीं आता और होता है वह चमत्कार है। जैसे भगवान का कोई अभिषेक नहीं कर रहा है हम अभिषेक की अनुभूति कर रहे हैं यही चमत्कार है।

 

आज सत्य से ऊपर उठकर अनुभव करना ये कल्पना है ही नहीं है सत्य है आज महाराजा रिषभदेव राजगद्दी संभाल रहे हैं तो आप भी अनुभव करें कि हम भी भरत बाहुबली के समय हुएं हैं।ये भरत है, ब्राह्ममी ,ये सुन्दरी है ये अनुभव करना है। साक्षात राजा रिषभ एलदेव राजगद्दी संभाल रहे हैं। ऐसा अनुभव करे फिर चमत्कार देखें हम देखते हैं कि आप आहार के समय शुद्धि बोलते है तो हम लोग मान लेते हैं डी एन ए की व्यवस्था है तो फिर जांच क्यों नहीं होती है सब हो सकता है तदभव मोक्ष गामी प्रदुम्न कुमार नक़ली माता पिता को असली माता पिता मानते हैं हो सकता है लेकिन फिर भी मुनि राज को शुद्धि सुनने को कहा गया है जो श्रावक ने शुद्धि वोली और साधु ने विश्वास कर लिया और आहार लें।

 

 

 

तपकल्याणक महोत्सव में राजाओं ने भेंट दी
कार्यक्रम की मीडिया संयोजक प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि दोपहर तप कल्याणक का कार्यक्रम शुरू हुआ ।32 हजार मुकुबद्र राजा नाभिराय के दरबार में भेंट प्रदान करते हैं सेनापति मुकुबद्र राजा की भेंट राजा के दरबार में रखवा देते हैं। सभी राजा अपने-अपने राज्य एवं अपना परिचय देते हुए भेंट करते हैं कुछ राजा रानी भक्ति कर दरबार से वापस चले जाते हैं महाराज के दरबार में अयोध्या की प्रजा परेशान होकर आती है कहती है महाराजा हमारे जीविका अभी तक कल्पवृक्ष के माध्यम से चलती थी। हम जो भी इच्छा करते थे वह पूरी हो जाती थी। महाराज अब कल्पवृक्ष समाप्त हो रहे हैं हम लोग भूखे मर जाएंगे हम लोग कैसे अपना जीवन चला पाएंगे कुछ उपाय करें महाराजा।

 

महाराजा रिषभ देव ने राज व्यवस्था
बनाई
महाराजा रिषभ देव ने सौधर्मेंद्र से विचार विमर्श किया प्रजा की समस्या का समाधान बताया। महाराज ने कहा जीवन में परिवर्तन आते रहते हैं उतार-चढ़ाव का नियम संसार का है। सुनो तुम्हें उतावला होने की जरूरत नहीं है। उसी समय से वर्ण व्यवस्था शुरू हो जाती है उसी समय से खेती करना हल चलाना शिक्षा देना आदि शुरू हो जाता है
तभी महाराज की दोनों बेटियां पहुंचती है ब्राह्मी, सुंदरी पिताजी आपने अक्षर विद्या का ज्ञान दिया मैंने इस पुस्तक में विधिवत तैयार करके देवनागरी विद्या छंद अलंकार आदि समाहित किए हैं। सुंदरी ने कहा पिताजी आपके द्वारा दी गई विद्या से मैंने जोड़ घटाना गुणा भाग नाप आदि की विद्या को व्यवस्थित करके इस पुस्तक को तैयार किया है। जब ब्रह्मी एवं सुंदरी की शादी की बात आती है तो दोनों बहने कहती हैं अपने पिता का सिर दूसरे के चरणों में नहीं झुकने दूंगा मेआजीवन ब्रह्मचारी व्रत का पालन करूंगी मध्यान में मुनिश्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि पहाड़ की चट्टान पर बैठकर आनंद प्राप्त होता तो समझ लो तुम्हारा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो रहा है जब सर्दी में नदी किनारे एवं बारिश के समय पेड़ के नीचे बैठने का मन करे तो जल्दी मोक्ष मिलने वाला है। अशुभ के समय सुख की अनुभूति होती है समझ लो मोक्ष जाना है। जहां रात नहीं निकलने वाला सूरज मांगलिक नहीं होता। और कुछ क्षण बाद राजा ऋषभ देव अपना संपूर्ण राज पाठ अपने दोनों पुत्रों को दे करके दीक्षा लिखकर तपस्या करने के लिए वन में चले जाते हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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