जहां हुई दीक्षा वही हुआ 98 वर्षीय क्षुल्लिका माताजी का गुरु चरणों में सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण

धर्म

जहां हुई दीक्षा वही हुआ 98 वर्षीय क्षुल्लिका माताजी का गुरु चरणों में सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण
पथरिया
पूज्य आचार्य श्री विराग सागर महाराज सानिध्य में पथरिया में महा महोत्सव विरागोदय तीर्थ संपन्न हुआ।
वही गजरथ फेरी के दौरान पिछले 49दिनों से सल्लेखना रत क्षुल्लीका 105 विरजमती माता जी का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण हो गया।

 

 

 

 

 

 

रोचकता की बात यह है कि माताजी की उम्र 98 वर्ष की थी और इतनी उम्र में भी उनकी संयम साधना देखते बनती थी। इसके साथ ही इनकी दीक्षा भी 24 नवंबर 2015 को इसी स्थान पर आचार्य श्री के कर कमलों द्वारा हुई थी। उन्होंने विगत 49दिन समस्त प्रकार के अन्न जल का त्याग की दिया था।

 

शुद्ध जैन भोजन के साथ यात्रा

 

शुद्ध जैन भोजन के साथ यात्रा

इसकी सूचना गजरथ फेरी के दौरान आचार्य श्री वैभव सागर जी को मिली वे फेरी के बीच में से ही माताजी के समीप पहुंचे। आचार्य श्री ने जानकारी देते हुए समाधि मरण का जैन दर्शन में महत्व को बताया उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में समाधि मरण उत्सव के रूप में माना गया है। यह मरण साहब ने की एक कला है। 8 वर्षों से आत्म साधना में लीन रही।

इस पर विशेष जानकारी देते हुए आर्यिका 105 विकम्या श्री माताजी ने बताया कि माताजी का चतुर्मास 2015 में अभाना में हुआ था। और उस समय उन्होंने समाधि के लिए कहा था। उन्होंने इस क्रम में बढ़ते हुए 24 नवंबर 2015 को क्षुल्लिका दीक्षा ली। उनकी यह भी इच्छा थी कि जहां उनकी दीक्षा हुई हो, वही उनकी समाधि भी हो। वह इस महा महोत्सव में शामिल हुई और इसी के मध्य उनकी यह अंतिम भावना पूर्ण हुई। माता जी के ग्रहस्थ अवस्था के बड़े पुत्र रूप चंद जैन, छोटे पुत्र धर्म चंद जैन मौजूद रहे। बड़े पुत्र रूपचंद जैन ने बताया दीक्षा के उपरांत 8 वर्ष तक आचार्य संघ में ही वह रही।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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