आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज का सीहोर मंगलप्रवेश हुआ….
परमात्मा से पहले प्रेम करना चाहिए उसके बाद प्रार्थना अपने आप हो जाती है। प्रज्ञा सागर महाराज
सीहोर
तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का मंगल आगमन सीहोर नगर में हुआ पूज्य आचार्य संघ की समाज जनों ने भव्य अगवानी की।

महाराज श्री में अपने प्रवचन में कहा कि लंबे समय के बाद अपनों से मिलने का आनंद ही कुछ अलग होता है।आज मैं जिसे देख रहा हूँ सीहोर में सब पहचाने हुए से लग रहे है।आपकी आँखे मुझे देख रही है और मेरी आँखें आपको।जितनी खुशी आपको हो रही है उतनी खुशी मुझे भी हो रही है।बस फर्क इतना है कि आप मुझे पहचान रहे है और मैं कोशिश कर रहा हूँ।पर आपके बीच आकर लग अच्छा रहा है।
सीहोर प्रवेश पर दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ मन्दिर छावनी में उपस्थित जनसमूह समक्ष बोलते हुए महाराज श्री ने कहा-परमात्मा से पहले प्रेम करना चाहिए उसके बाद प्रार्थना अपने आप हो जाती है।जबकि अभी आप उल्टा कर रहे है, परमात्मा से प्रेम है नही और प्रार्थना किये जा रहे है।अब बताइए बिना प्रेम के प्रार्थना क्या कभी पूरी हो सकती है।कभी नहीं।अतः परमात्मा से प्रेम करिए।प्रेम तभी होगा जब परिचय होगा अतः सबसे पहले उससे परिचय करिए,परिचय होते ही उनसे मिलना उनके दर्शन अपने आप होने लगेंगे।लोग देव दर्शन का नियम ले लेते है और जीवन भर नियम ही पालते है लेकिन न उनसे परिचय हो पाता है और न प्रेम।बस एक क्रिया चलती रहती है।यही वजह है कि हमें पूजा प्रार्थना का फल नहीं मिल पाता।
29 साल बाद सीहोर आया हूं।

पूज्य आचार्य श्री ने 29 वर्ष पूर्व की स्मृति को जाहिर करते हुए कहा कि आज मैं 29 साल बाद सिहोर आया।


इसके पहले मुनि श्री तरुण सागर जी के साथ 1994 में आना हुआ था।माना कि इस बीच भी दो बार आया हूँ परन्तु उस समय रुकना नहीं हुआ था। इसलिए उसे मै आना नहीं कहता हूँ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
