राजा, गुरु,देव, मंदिर और भगवान के समक्ष कभी खाली हाथ नही जाना चाहिए, गुरु के पास जब भी जाओ कुछ ना कुछ त्याग के नियम लेना चाहिये. जैन संत सिद्धसागर महाराज

धर्म

राजा, गुरु,देव, मंदिर और भगवान के समक्ष कभी खाली हाथ नही जाना चाहिए, गुरु के पास जब भी जाओ कुछ ना कुछ त्याग के नियम लेना चाहिये. जैन संत सिद्धसागर महाराज

रामगंजमंडी
शहर के बाजार 3 में स्थित जैन श्वेताम्बर मंदिर में विराजित जैन संत सिद्धसागर महाराज ने प्रवचन में कहा राजा गुरु,देव, मंदिर और भगवान के समक्ष कभी खाली हाथ नही जाना
चाहिये गुरु के पास जब भी जाओ कुछ ना कुछ त्याग के नियम लेना चाहिये।

 

:- मनुष्य भव दुर्लभ :

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जैन संत ने कहा कि मनुष्य भव मिलना दुर्लभ है. मनुष्य भव मिलने के बाद मन में त्याग और संयम की भावना होनी चाहिये. मनुष्य भव को खीर पीने मे नही गवाना चाहिये। मनुष्य भव मे गलत चीजों को इकट्ठा किया तो इसके परिणाम कई भवो तक भुगतने पडेंगे – सच्चा जैनी वही है जो जमीकंद का उपयोग नही करे ओर जिसके मन में पाप के कार्यों की पीडा होती हो।

पूज्य संत ने हिंसा ओर झूठ का सबसे बडा माध्यम मोबाईल को
बताया- हिंसा नही करने की नसीयद देते हुए जैनसंत ने कहा कि अनजाने में अगर हिंसा होती भी है तो पहले नवकार मंत्र का पाठ करना चाहिये।
नवकार मंत्र की महिमा को महान बताते हुए उन्होंने कहा कि मरते हुए को नवकार मंत्र सुनाने से उसके भव
सुधर जाते है। नवकार मंत्र शाश्वत है इसे श्वेताम्बर,दिगंबर, स्थानकवासी, तेरापंथी सभी मानते हैं। जो जिनवाणी का श्रवण करे उसे श्रावक कहा जाता है।

 

मोक्ष में जाने के लिये मनुष्य भव जरूरी :

 

– जैन संत सिद्धसागर जी महाराज श्री ने कहा कि मोक्ष में जाने के लिये मनुष्य भव होना जरूरी- मनुष्य भव में सुनना, समझना
और आचरण करना तीनो का समावेश रहता है। जैन संत ने चार चीजों को दुर्लभ बताया पहला मनुष्य भव मिलना, दूसरा धर्म का श्रवण करना, तीसरा श्रद्धा, और चौथा संयम।

जैन श्वेताम्बर श्री संघ के अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि रविवार को भी प्रवचन होगे और दोपहर में दादाबाडी मे दादागुरु देव की पूजा होगी।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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