नगर गौरव आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी आर्यिका श्री गंभीर मति जी एवम् अन्य साधुओं की जन्म नगरी में आचार्य श्री का रत्नत्रय रूपी तीसरी बार प्रवेश।

धर्म

नगर गौरव आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी आर्यिका श्री गंभीर मति जी एवम् अन्य साधुओं की जन्म नगरी में आचार्य श्री का रत्नत्रय रूपी तीसरी बार प्रवेश।
निवाई राजस्थान
धर्म का वास्तविक आनंद तो तब है जब आप ध्यान लगाकर बैठे, और भेद विज्ञान रूपी ज्योति जागृत हो जावे । वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आगे कहा कि अंतरंग का रसा स्वाद आ जावे तो समझ लेना कि धर्म का अंकुर हमारे ह्रदय में अंकुरित हो गया ।आचार्य श्री के उद्बोधन के पूर्व आर्यिका श्री विज्ञा श्री माताजी ने कहा कि जिन नगरों में ऐसे महा ऋषि यों का समागम श्रावको को मिलता है ,वह अपना अहो भाग्य मानते हुए उनके चरण सानिध्य में रहकर साधना करते हैं, गुरुओं की सेवा वृत्ति करते हैं, साधुओं को आहार दान देते हैं उससे उन्हें तीव्र पुण्य का आश्रव होता है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण एवम् दीप प्रवज्जलन अतिथियों द्वारा किया गया। श्री शोभा जैन द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया।

 

 

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि आचार्यश्री वर्धमान सागर जी का विहार
श्री महावीर जी से किशनगढ़ की और संघ सहित चल रहा है।
श्रावको के निवेदन आग्रह कर अपने शिष्या आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी एवम् अन्य साधुओं की जन्म भूमि निवाई में वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का तीसरी बार संघ सहित 24 दिसंबर को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शोभा यात्रा का समापन अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर निवाई में हुआ
गुरुदेव के तीसरी बार नगर आगमन को लेकर जैन समाज ही नहीं संपूर्ण नगर उत्साहित हैं
श्री रवि पाटनी पवन बोहरा श्री हेमंत जैन ने श्री जितेन्द्र जैन वाइस चेयरमैन नगर पालिका निवाई,श्री महावीर प्रसाद पराणा समाज मंत्री , श्री सुरेश पाटनी श्री राजेश चौधरी श्री महेंद्र जैन श्री जय ,श्री गोपाल जी ने बताया कि
नगर में तीसरी बार प्रवेश
सन 1979 में आचार्य श्री का प्रथम आगमन मुनि रूप में हुआ।
आपका चातुर्मास भी निवाई में हुआ ।
दूसरी बार सन 2015 में
वर्ष 2014 किशनगढ़ में 25 वा रजत कीर्ति आचार्य पदारोहण एवम् चातुर्मास के बाद वर्ष 2015 का चातुर्मास निवाई में हुआ।
तीसरी बार प्रवेश अनूंठा संयोग
वर्ष 2018 में 1008 श्री बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक के लिए आप तीसरी बार निवाई राजस्थान से कर्नाटक गए।
यह अद्भुत संयोग है कि कर्नाटक से राजस्थान वापस विहार का निमित पुन महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम रहा।
24 का संयोग
इस बार प्रसंग 24 वे तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के 24 वर्षो बाद महामस्तकाभिषेक का रहा। आचार्य श्री का नाम भी 24 वे तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के एक नाम श्री वर्धमान स्वामी सम रूप श्री वर्धमान सागर है।
नगर में प्रवेश भी 24 दिसंबर को हुआ है। निवाई नगर इस प्रसंग से गोरवान्वित है।
समाज के प्रवक्ता श्री विमल जैन जोला ने बताया कि समाज सहित सभी प्रवेश को ऐतिहासिक बनाने के लिए नगर को सैकड़ों स्वागत द्वार जैन झंडे ,फ्लेक्स बैनर से सजाया गया। घर घर रांगोली बनाई गई हैं ।
आर्यिका श्री विज्ञा श्री माताजी ने की आगवानी
नगर में पूर्व से विराजित आर्यिका श्री विज्ञा श्री माताजी ने 9 आर्यिका माताजी संघ सहित आगवानी कर आचार्य भक्ति की।
राजकीय अतिथि की शासन प्रतिनिधियों द्वारा आगवानी
उल्लेखनीय है कि वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को राजस्थान शासन द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है, शासन की ओर से,श्री दिलीप ईसरानी नगर पालिका के अध्यक्ष, श्री जितेन्द्र जैन उपाध्यक्ष नगर पालिका , श्री प्रांजल कंवर तहसील दार सहित पुलिस विभाग एवम् अनेक राजकीय प्रशासनिक अधिकारी राजकीय अतिथि के स्वागत हेतुउपस्थित रहे।
नगर में जन्मी आर्यिका माताजी
का जीवन परिचय
राजेश पंचोलिया इंदौर ने
आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी के परिचय बाबद बताया कि श्रीमती प्रेमदेवी श्री पदम जी को पुत्री बाल ब्रह्मचारिणी अंजना दीदी का जन्म सन 1978 कार्तिक कृष्णा एकम को निवाई में हुआ आपने लौकिक शिक्षा हायर सेकेंडरी तक प्राप्त की है।
आर्यिका दीक्षा

 

 

 

 

 

पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सिद्ध हस्त कर कमलों से आपकी आर्यिका दीक्षा एक फरवरी 2013 को टीकमगढ़ मध्य प्रदेश में हुई। आपका नूतन नाम आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी किया गया। आपके साथ उसी दिन एक और आर्यिका श्री पूर्वी मति जी की भी दीक्षा हुई।
नगर निवाई से आपके अतिरिक्त मुनिराज अन्य आर्यिका माताजी क्षुल्लक जी भी है।


नगर में आर्यिका दीक्षा
वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री के द्वारा निवाई में 27 नवंबर 2015 को आर्यिका श्री विनम्र मति जी की आर्यिका दीक्षा हुई
समाधि भूमि
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी की प्रभाविका विदुषी शिष्या आर्यिका श्री आदि मति जी की समाधि भी निवाई में हुई है।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिघि भक्त परिवार।                                   संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

 

 

 

 

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