एक हजार बालकों के मस्तक पर स्वास्तिकबनाकर मंत्रोच्चार से किया उपनयन संस्कार
गुना
पूज्य मुनिश्री अक्षयसागर महाराज सानिध्य प्रताप छात्रावास हो रहे सिद्धचक्र महामंडल में रविवार को
एक हजार बालकों व 500बालिकाओं के संस्कार हुए। मुनिश्रीअक्षय सागरजी, नेमी सागरजीअचल सागरजी, शैल सागरजी व ऐलक उपशम सागरजी महाराज नेउपनयन संस्कार किया जिसमें मुनिसंघ द्वारा एक-एक बच्चे
के मस्तिष्क पर स्वास्तिक बनाकर मंत्रोच्चारण के साथ संस्कारित किया।
कार्यक्रम में गुना के अलावा म्याना,सिरोंज, रुठियाई, राघौगढ़,एनएफएल, बीनागंज, कुंभराज,
आरोन, शाढ़ौरा, अशोकनगर,मुंगावली से अभिभावकों के साथबच्चे पहुंचे। पूज्य मुनि संघ ने संस्कारित कर
परंपरा को पुनर्जीवित कर दिया। छात्रावास मेंसुबह 6.30 से 11 बजे तक तोविधान हुआ। इसके बाद 8 से 20
वर्ष तक के बच्चों व किशोरों काउपनयन संस्कार आरंभ हुआ।
उपनयन संस्कार के बाद मुनि भी बन सकते हैं बालक
जैन समाज के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि उपनयन संस्कार के बाद ही युवा व बच्चे जो धर्म के संस्कारों में आते हैं इसके बाद वे हर तरह की धार्मिक क्रिया कर सकते हैं। जैन परंपरा मेंतो यह भी लिखा है कि संस्कार के बाद 8 साल या इससे अधिक आयु वाले बालक मुनि भी बनसकते हैं।
उपनयन संस्कार की परंपरा जैनधर्म में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के समय से थी। शैल सागरजी महाराज
इस मौके पर मुनिश्री शैल सागरजी महाराज ने कहा कि उपनयन संस्कार की परंपरा जैनधर्म में प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के समय से थी। लेकिन पिछले कुछ समय से यह परंपरालगभग विलुप्त हो चुकी थी। जिसे मुनिसंघ द्वारा पुनर्जीवित किया जा रहा है। गत वर्ष भोपाल मेंभी हजारों की संख्या में बच्चों का मुंडन उपरांत उपनयन संस्कार हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
