यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो अपनी बेलगाम इच्छाओं को कम कीजिए। अपनी खुशियों को बांटना सीखिएप. पू. श्रमण मुनि श्री विशल्यसागर जी मुनिराज
झुमरीतिलैया-कोडरमा
मुनि श्री 108 विशल्य सागर जी मुनिराज ने नया जैन मंदिर में अपने प्रवचन श्रृंखला में कहा कि यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो अपनी बेलगाम इच्छाओं को कम कीजिए। अपनी खुशियों को बांटना सीखिए ,दूसरों की विशेषताओं का सम्मान कीजिए और मौका पड़ने पर त्याग का आदर्श उपस्थित कीजिए। हमेशा खुश रहिए : क्योंकि परेशान होने से कल की मुश्किल दूर नहीं होगी बल्कि आज का सुकून भी हाथ से चला जाएगा।
खुशियों की अलग-अलग परिभाषाएँ हैं। कोई देकर खुश होता है तो कोई छीनकर,कोई धन पाकर खुश है तो कोई त्याग कर। खुशियां केवल किस्मत का खेल नहीं है यह हमारी मनोदशाओं के आधार पर निर्मित होती हैं।मन की दशा को ठीक रखिए ,खुशी की खुशबू आपके पास होगी। खुशी तो तितली की तरह है जिसे पकड़ने की कोशिश की जाए तो उड़ जाती है अगर स्वयं को शांतिमय बनाने का संकल्प कर लें तो यह चुपचाप हमारे कंधे पर आकर बैठ जाया करती है । श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर झुमरी तिलैया ( कोडरमा ) में विराजमान प. पू . मुनि श्री विशल्यसागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कहां की खुशी के लिए लॉटरी जितना, अच्छी नौकरी पाना या व्यवसाय में बढ़ोतरी होना जरूरी नहीं है ,जीवन की खुशियां मुस्कान ,सकारात्मक सोच और मानसिक शांति की पूँजी में है। आधे भरे हुए गिलास को आधा खाली मानें या आधा भरा ।आप पर निर्भर है। खुश रहना चाहते हैं तो आधा भरा देखें। यह फार्मूला जीवन में दु :ख और परेशानी से मुक्ति दिला सकता है। इसे जीवन के हर पहलू में अपनाने की कोशिश कीजिए ।अपनी खुशियां को अपने इर्द – गिर्द ढूंढिए ,प्रकृति से प्रेम कीजिए, रचनात्मक बने रहिए ,योगासन कीजिए ,अध्यात्म और ध्यान से जुड़े रहिए, संगीत का आनंद लीजिए और सदाबहार मुस्कुराते रहिए ।किसी खुश व्यक्ति को देखकर हम पूछा करते हैं कि आपकी खुशी का राज क्या है? राज इतना ही सीधा है जितनी आपकी नाक। जब सुबह उठते पर दो विकल्प आपके सामने हों कि खुश रहूँ या दुखी, तो सदा सर्वदा खुश रहने का विकल्प चुनिए। हम इतने ही खुशी रहते हैं जितने खुश रहना चाहते हैं, अगर आप दु:खी होना चाहते हैं तो याद रखिए कि यह दुनिया का सबसे सरलतम काम है।जीवन में मधुर मुस्कान से भरे रहिए ताकि कैमरे के सामने खड़े हो तो फोटोग्राफर को कहना न पड़े ‘ स्माइल प्लीज ‘ ।मुस्कान खुशी को व्यक्त करने का आसान तरीका है। इसे लेते भी रहिए और देते भी रहिए ।स्वयं खुश होना चाहते हैं तो अपनी ओर से औरों को सदा खुशियां बांटिए, दूसरों को दु:खी करके स्वयं कभीप्रसन्ना न रह सकेंगे। जो अंतस की खुशी और हृदय के आनंद के स्वाद को चख लेते हैं उन्हें बाहर की खुशियां आडंबर सरीखी लगने लगती हैं ।प्रकृति ने मनुष्य की डिजाइन इस तरह बनाई है कि वह हमेशा वही करता रहे जिसमें खुशी मिलने की उम्मीद हो।प्रकृति ने सारी दुनिया हमारी खुशी के लिए बनाई है, इसलिए दुख और पीड़ा की मानसिक संतापना झेल कर प्रकृति के उद्देश्य को निष्फल मत कीजिए।
आज का मंगलाचरण संघस्थ अलका दीदी ओर भारती दीदी ने किया मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा,नवीन जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमड़ी
