मुनिश्री विशदसागर महाराज, मुनिश्री निरापदसागर महाराज, मुनिश्री 108 निराकुलसागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्न हुआ।

धर्म

मुनिश्री विशदसागर महाराज, मुनिश्री निरापदसागर महाराज, मुनिश्री 108 निराकुलसागर महाराज का पिच्छिका
परिवर्तन समारोह संपन्न हुआ।

इन्हे मिला सोभाग्य

इस अवसर पर मुनिश्री विशदसागर महाराजको नवीन पिच्छिका प्रदान करनेएवं पुरानी पिच्छी लेने का सौभाग्यविपिन कुमार संगीता जैन को, मुनिश्रीनिरापदसागर महाराज की नवीन
पिच्छिका लेने एवं पुरानी पिच्छी देनेका सौभाग्य समस्त समाज को प्राप्तहुआ। मुनिश्री 108 निराकुलसागरमहाराज को नवीन पिच्छिका देनेका सौभाग्य विवेक सपना ग्योंड्याको एवं पुरानी पिच्छिका लेने कासौभाग्य सानौधा निवासी साक्षी साक्षी दीदी, नैंसी दीदी के परिवारजन को प्राप्त हुआ समारोह के पूर्व नवीन पिच्छियों कोगाजेबाजे से समाजजन बस स्टैंड सेमंदिर तक लेकर आए। ब्रह्मचारिणीनैंसी दीदी के मंगलाचरण के साथकार्यक्रम शुरू हुआ। नंदिता जैन ने गुरु महिमा पर आधारित सांस्कृतिककार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई।
पानी के संपर्क में आकर भूमि में दबे बीज अंकुरित हो जाते है निरापदसागर महाराज
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित  करते हुए मुनिश्री108 विशदसागर जी महाराज नेकहा वर्षा ऋतु में जीवोत्पत्ति विशेषरूप से हो जाती है। पानी के सम्पर्कमें आकर भूमि में दबे बीज अंकुरितहो जाते हैं। सीलन, फलन, फफूंद,काई की उत्पत्ति हो जाती है। त्रसव स्थावर जीवों की अधिकता केकारण उनकी विराधना की संभावना अधिक
हो जाती है। अतः साधु संतोके साथ सदा चलने वाली पिच्छिकाके माध्यम से जैन संत सूक्ष्म जीवोंका घात होने से बचाते है।

 

 

 

 

 

इस मौके पर ज्ञानोदयमहिला मंडल, सुधासागर महिलामहासमिति, जैन संस्कृति मंडल,पाठशाला परिवार, जैन युवा संघ,ज्ञानोदय हाथकरघा प्रबंधन समितिएवं सकल जैन समाज के सदस्य
उपस्थित थे। मीडिया प्रभारी अनुजजैन ने बताया कि जैन धर्म मेंचातुर्मास का विशेष महत्व है।

 

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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