ज्ञानी और महान आत्मा अपने साथ रहने वालों को भी अपने जैसा बना लेती है: विज्ञमती माताजी

धर्म

ज्ञानी और महान आत्मा अपने साथ रहने वालों को भी अपने जैसा बना लेती है: विज्ञमती माताजी

ग्वालियर
व्रत साधना होता है,मनोरंजन का साधन नहीं होता। व्रत सद्गति देता है, उसका खंडन दुर्गतिकरता है। इसलिए व्रत पूरी श्रद्धा और
शुद्धता से करना चाहिए। यह उद्गारआर्यिका विज्ञमती माताजी ने गुरुवारको चम्पाबाग धर्मशाला में व्यक्तकिए। उन्होंने कहा कि धार्मिकअनुष्ठान करते-करते तीर्थकर पदपाने की कामना करना गलत नहीं है।इंसान कितना भी पुरुषार्थ कर ले,लेकिन उसे समय और भाग्य से पहलेकुछ नहीं मिलता। कोई भी व्यक्तिकितना भी बड़ा क्यों न हो, तीर्थंकरसे बड़ा नहीं होता। जब अहंकार आड़े
आ जाता है तो बलशाली भी नष्ट होजाता है। इसलिए कभी अहंकार नहींकरना चाहिए।

 

 

 

पूज्य माताजी ने कहा की तीर्थंकरों के चरणों के मूल में बैठकरदीक्षा लेकर गुरु परंपरा का अनुसरणकरने वाले गणधर देव बने। ज्ञानी और महान आत्मा अपने साथ रहनेवालों को भी अपने जैसा बना लेती है। जिसने धर्म को छोड़ा, धर्म उसे डुबा देता है, इसलिए धर्म को कभीनहीं छोड़ना चाहिए।
25 को चढ़ेगा भगवान महावीर स्वामी को लाडू

 

चम्पाबाग धर्मशाला में 25 अक्टूबर को सुबह गणिनी आर्यिका105 विशुद्गमती माताजी संघ के सानिध्य में भगवान महावीर स्वामी का मोक्ष दिवस मनाया जाएगा, जिसमें भगवान के चरणों में लाडू चढ़ाया जाएगा। उसी दिन चातुर्मास का समापन कर कलश दिए जाएंगे।
ललित जैन “भारती” (प्रवक्ता जैन समाज ग्वालियर से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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