हमारे अच्छे कर्म करने से दूसरे को भी अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है क्षमासागर जी महाराज
मैत्री विचार-प्रवचन
*परमपूज्य मुनिश्री क्षमासागर जी *मुनिश्री क्षमासागर जी* एक पान वाले के उदाहरण के माध्यम से बताते हैं कि हमारे अच्छे कर्म करने से दूसरे को भी अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है,
अगर हम बेईमानी करते हैं तो दूसरे को भी वही प्रेरणा हम दे रहे होते हैं… इसलिए हमें अपना और दूसरे का जीवन अच्छा बनाने के लिए शुरुआत स्वयं से ही करना होगी ।
अच्छा कर्म करते समय हमें शरीर की सुख सुविधा और इसके प्रति आसक्ति को छोडना होगा तभी हम अच्छा कर पाएंगें, आसक्ति बनी रही तो अच्छा करने के अवसरों से हम चूकते रहेंगें ।
——————————
