भोजन ही औषधी है, केमिकल चेंज के कारण ऋतु के अनुसार भोजन नही करने पर पोइजन बन जाता है कनकन्दी गुरुदेव
भीलूड़ा
अध्यात्म योगी आचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि तुम्हारा शरीर वह है जो तुम खाते हो as you think so you become शरीर विज्ञान के अनुसार शरीर chemical neurone DNA RNA से बना है भोजन भी केमिकल है, दूध दही मट्ठा घी की ही पर्याय हैं। दूध में दही डालने पर फट जाता है। आयुर्वेद में पथ्य भोजन ही औषधि हैं। केमिकल चेंज के कारण ऋतु के अनुसार भोजन नहीं करने पर पोइजन बन जाता है। खट्टा दही नहीं खाना चाहिए।
जीव्हा लालसा नहीं छोड़ पाने के कारण अस्वस्थ रहते हैं। फल ककड़ी आदि कच्चा खाना चाहिए। कुछ सब्जियां बनाकर उबालकर खाई जाती है। अनाज मोटा खाना चाहिए। शरीर विज्ञान के अनुसार भी मनुष्य की संरचना अन्य जीवो से अलग है हर मनुष्य की अलग रात दिन की सुबह शाम की अलग अलग प्रकृति होती हैं।


भोजन 32 बार नहीं चबाने पर अनेक रोग हो जाते हैं तथा छोटी आत बड़ी आत को अधिक मेहनत करनी पड़ती हैं।

मनुष्य की संरचना शाकाहारी भोजन के अनुसार ही बनी है।शरीर में केमिकल के योग्य भोजन व पानी चाहिए। घी बुद्धि वर्धक होता है। शरीर पुदगल की उत्कृष्टतम संरचना हैं। भोजन के प्रारंभ में घृत मिश्रित मिष्ठान खाएं उस समय शरीर की उष्णता बढ़ती है तो उस समय ऐसा केमिकल स्राव होता है पेट में एसिड होता है जो मीठे भोजन को जल्दी पचा लेता है। प्रारंभ में पानी नहीं पीना चाहिए नहीं तो मंदाग्नि हो जाएगी ।अंतिम में भी कम ही पानी पीना चाहिए। पानी को धीरे धीरे पीना चाहिए। जीव्हा में अनेक प्रकार के केमिकल होते हैं जो भोजन को पचाते हैं। भोजन जीव्हा से पचना प्रारंभ होता है, छोटी आत बड़ी आत आदि से होता हुआ लघु शंका दीर्घ शंका तक भोजन पचता हैं। गरम भोजन के बाद ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। प्रत्येक का शरीर अलग-अलग होने से अलग-अलग प्रकार के भोजन की आवश्यकता रहती है। जिस प्रकार रॉकेट कार गाड़ी सब में अलग-अलग इंधन की आवश्यकता होती हैं। आचार्य श्री ने कहा की तुम्हें शांति और खुशी चाहिए तो प्रकृति की गोद में आओ आचार्य श्री की शिष्या डॉ रीता जैन मुंबई ने अपना अनुभव बताया कि केमिकल पोइज़निंग से अधिक रोग होते हैं।
दूध ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन लगाने के कारण हारमोंस हमारी बॉडी में जाते हैं जिससे अनेक रोग होते हैं। शुद्ध गाय का दूध व घी खाना चाहिए नहीं तो नहीं लेना चाहिए। जूस आदि में मिली हुई वाइट शुगर वाइट पोइजन होती हैं। मीठा खाने के लिए देसी गुड़ लाल गुड़ खाना चाहिए। सीजनल फूड ही सुपाच्य रहता है।
चाईना में कैंसर कम होता है
उन्होंने कहा चाइना में कैंसर कम होता है क्योंकि डेरी प्रोडक्ट कम प्रयोग करते हैं। डेरी प्रोडक्ट कम यूज करने से बहुत सारे रोग कम होते हैं। olive oil अलसी के बीज, बादाम, अखरोट, काजू का प्रयोग करना चाहिए। प्रोटीन में मूंग की दाल तुवर की दाल लेनी चाहिए। जैविक खेती से बने चावल दाल प्रयोग करना चाहिए। ज्वार बाजरा रागी ठंडी में बाजरा अधिक प्रयोग करना चाहिए। नारियल तेल, तिल्ली का तेल अधिक प्रयोग करना चाहिए। लौकी व ककड़ी स्वास्थ्य के लिए अच्छी रहती है एसिड कम करती है। रो टमाटर भिन्न भिन्न कलर की सब्जियां तथा फ्रूट्स खाने चाहिए। उन्होंने आचार्य श्री के लिए कहा आचार्य श्री तो मास्टर ऑफ ऑल हैं उन्हें हर विषय का ज्ञान हैं। विजयलक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
