ग्वालियर का जय विलास महल एक धरोहर है
ग्वालियर
हम ऐसे अभूतपूर्व स्थल पर पहुचे जो सचमुच एक धरोहर के रूप में हम बात कर रहे है 35 कमरों का सिन्धिया महल जो संग्रहालय के रूप में है जो आम जन के लिये भी ख़ुला है। 35 कमरों का है।मेने स्वयम ने भी देखा जो भव्यता को दर्शाता है। यह एक विरासत के रूप में है। मन करता है बस देखे जाओ । उनका पूजा स्थल भी अभूतपूर्व था

महल पर लगे फानुसो पर गोर करे तो मन फटा रह जाता है , जी हा
इसका भार दो-दो टन का है।, कहा जाता रहा है जब इन्हें तब टांगा गया जब दस हाथियों को छत पर चढा कर छत की मजबूती मापी गई। कही अलौकिक रानी जी का भवन,राजा का भक्नउनका आरामगाह श्रृंगार कक्ष उनका पहनावा अस्त्र शस्त्र देख मन
कौतूहल पैदा करता है बगियों का संग्रहण सब कुछ एक नायाब सा लगता है बनी हुई नक्काशी एक धरोहर की निशानी कहती है राजा साहब के रजत स्वर्ण रथ ऐसी कही भव्यता वहां देखी जा सकती है उनके खेलने का गोल्फ किट, क्रिकेट किट वो उपहार जो उन्हें विदेशो से मिले शतकों बीत जाने के बाद भी वह सजीवता को प्रदर्शित करती है।वही संग्रहालय की एक और प्रसिध्द चीज है, चांदी की रेल जिसकी पटरियां डाइनिंग टेबल पर लगी हैं और विशिष्ट दावतों में यह रेल पेय परोसती चलती है। इटली, फ्रांस, चीन तथा अन्य कई देशों की दुर्लभ कलाकृतियां यहाँ मौजूद हैं जो शायद विश्व में कही नही होगी देखकर मन चकित सा हो जाता है हमने कोशिश की वहां के चित्रों का संयोजित किया जा सके पर आप तक प्रेषित की जा सके
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

