14 सितम्बर हिन्दी दिवस पर विशेष* *भाषायी पर्वतों से कब उदय होगा? राष्ट्रभाषा का सूर्य- राँका*

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*14 सितम्बर हिन्दी दिवस पर विशेष*

*भाषायी पर्वतों से कब उदय होगा? राष्ट्रभाषा का सूर्य- राँका*

 

 

 

 

भारत एक विशाल धर्म निरपेक्ष देश है। यहाँ विभिन्न धर्मों के मानने वाले, विभिन्न भाषाओं को बोलने वाले लोग रहते है। भारतीय संविधान के अनुसार हिंदी भारत की राजभाषा है। विश्व के अधिकांश देशों में हिंदी भाषा-भाषी लोग रहते हैं। भारत के अलावा फिजी, मारीशस, ट्रिनिदाद,इंग्लैंड, कनाडा,नेपाल, सूरीनाम जैसे अनेक देशों में हिंदी के पठन- पाठन की व्यवस्था है।


हमारा देश 15 अगस्त,1947 को आजाद हुआ था। आजादी के बाद भारतीय संविधान सभा द्वारा हिंदी के महत्त्व को देखते हुए अनुच्छेद 343 के तहत 14 सितम्बर,1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया। इसलिए प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारतीय संविधान में वर्तमान में 22 भाषाओं को मान्यता प्रदान की गई है-असमिया, उड़िया, उर्दू, बाँग्ला, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, गुजराती, तमिल, तेलुगू, नेपाली,पंजाबी, मलयालम, मराठी, मणिपुरी, सिंधी, संस्कृत, हिंदी, बोडो, संथाली, डोगरी और मैथिली।
हिंदी भाषा की विशेषताएँ – हिंदी इसे सीखना अत्यंत सरल है। यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। इसका शब्द भंडार बहुत विशाल है। हिंदी भाषा में अनेक शब्दों को अपनाने की क्षमता है। हिंदी में उत्कृष्ट कोटि की साहित्य रचनाएँ विद्यमान हैं।
मातृभाषा का अर्थ है अर्थात् ‘मातृ’ माँ की भाषा । छोटे शिशु सबसे ज्यादा अपनी माँ के साथ रहता है। माँ जिस भाषा को बोलती है।शिशु धीरे-धीरे उस भाषा को सीख लेता है और वही उस बच्चे की मातृभाषा कहलाती है। मातृभाषा सबकी अलग-अलग हो सकती है परन्तु राजभाषा सबकी हिंदी ही है। भारत में हिंदी भाषी क्षेत्र हैं। उत्तर प्रदेश, झारखंड,उत्तरांचल, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, हरियाणा,हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश हिंदी भाषी क्षेत्र कहलाते है। भारतीय संविधान के अनुसार हिंदी भारत की राजभाषा है जिसका प्रयोग संपूर्ण राष्ट्र के लोग करते हैं भारत में हिंदी का प्रयोग किसी न किसी रूप में सभी राज्यों में किया जाता है जिससे स्पष्ट है कि हिंदी भारत की राजभाषा है।
10 से 12 जनवरी,1975 में तीन दिवसीय विश्व हिंदी सम्मेलन का पहली बार आयोजन नागपुर (भारत) में हुआ। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार और उत्थान के लिए चर्चा की गई। इस सम्मेलन की याद को चिर स्थाई बनाने के लिए प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। द्वितीय विश्व हिंदी सम्मलेन मॉरिशस,तीसरा नई दिल्ली (भारत) चौथा मॉरिशस, पाँचवा पोर्ट ऑफ स्पेन, छठा लंदन(इंग्लैंड) सातवाँ पारामरिखो (सूरीनाम) आठवाँ न्यूयॉर्क (अमेरिका) नौवा जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) दसवाँ भोपाल ग्यारहवाँ मॉरिशस में आयोजित किया गया।
हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अनेक साहित्यकार हुए हैं जिन्होंने अपनी लेखनी से विश्व को ज्ञान का अद्भुत भंडार प्रदान किया। जिसमें कबीर दास जी, रहीम दास जी, तुलसीदास जी,भारतेंदु हरिश्चंद्र, केशव, मुंशी प्रेमचंद, माखनलाल चतुर्वेदी, रामधारी सिंह दिनकर,शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ सुमित्रानंदन पंत, मैथिलीशरण गुप्त,हरिवंश राय बच्चन, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा,सुभद्रा कुमारी चौहान आदि अनेक साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया जो अविस्मरणीय है।
भारत में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अनेक संस्थाएँ हैं। जो अहर्निशं हिंदी की उन्नति में अपना विशेष सहयोग प्रदान कर रहे है और हिंदी को, राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रयासरत है।
अनेक संत महात्माओं ने भी हिंदी के प्रचार प्रसार पर जोर दिया है। जैन धर्म के प्रमुख संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज भी हिंदी भाषा के पक्षधर है। इण्डिया नही हिंदी में भारत कहो। देश की उन्नति अपनी भाषा में ही संभव है।
प्रतिवर्ष हम 14 सितम्बर को हिंदी दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन करते है। भारत को आजाद हुए 75 साल पूरे हो गए परन्तु हमारी हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मानित पद आज तक नहीं मिला। जिस देश में हिंदी बोलने वाले करोड़ों की संख्या में है। उपरोक्त हिंदी के महत्त्व व हम सभी हिंदी प्रेमियों की भावनाओं को देखते हुए भारत सरकार को शीघ्रताशीघ्र भारतीय संविधान में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा का सम्मानित दर्जा प्रदान कर हिन्दी भाषा को गौरवान्वित करे। यही हम सबकी कामना है।

संस्कृत भाषा की बेटी, हिंदी भाषा बड़ी महान।
हिंदी दिवस पर हम नित करे,हिंदी का गुणगान।।

हिंदी भाषा हमारा मान,सम्मान और स्वाभिमान है।
हिंदी भाषा राष्ट्रभाषा बने, हम सबका अरमान हैं।।

आलेख रचयिता
रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’
(हिन्दी शिक्षक)
जयपुर राजस्थान

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