पर पदार्थो परिग्रहों के प्रति ममत्व भाव हटाना आकिंचन्य धर्म है आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघस्थ 7 प्रतिमा धारी साधना दीदी ने आज आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के समक्ष ब्राह्य परिग्रह घर सभी चल अचल संपत्ति का आजीवन त्याग किया।

धर्म

पर पदार्थो परिग्रहों के प्रति ममत्व भाव हटाना आकिंचन्य धर्म है
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघस्थ 7 प्रतिमा धारी साधना दीदी ने आज आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के समक्ष ब्राह्य परिग्रह घर सभी चल अचल संपत्ति का आजीवन त्याग किया।
श्री महावीरजी
श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में विराजमान वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज ने दशलक्षण पर्व के नौवें दिन गुरुवार को आकिंचन्य धर्म की विवेचना की

 

आप अकेला अवतरे मरे अकेला होय ,यो कबहु इस जीव का साथी सगा न कोय ।
बारह भावना की यह पंक्तियां एकत्व भावना की है जो यह उपदेश देती है कि कि में अकेला हू। कल तक दश लक्षण पर्व में सभी धर्मों को सुना है, समझने की कोशिश कर रहे है। 24 प्रकार के परिग्रहों को त्यागने से आकिंचन्य धर्म प्रकट होगा यह मंगल देशना वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने प्रकट की।
विशेष उल्लेखनीय बात


आज की विशेष उल्लेखनीय बात यह रही की संघस्थ 7 प्रतिमा धारी साधना दीदी ने आज आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के समक्ष ब्राह्य परिग्रह घर सभी चल अचल संपत्ति का आजीवन त्याग किया। इतना ही नही इसके पूर्व इनके द्वारा आचार्य श्री के अवतरण दिवस भादव सुदी सप्तमी को सोने का छत्र श्री महावीर स्वामी की मूल प्रतिमा पर अर्पित किया। जो अपने आप एक अद्वितीय है।
जानकारी देते हुए पूनम, दीप्ती दीदी, राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने प्रवचन में 10 प्रकार के बहिरंग परिग्रह क्षेत्र ,मकान,जवाहरात, दास दासी धन धान्य वस्त्र बर्तन आदि
के बारे में बताकर अंतरंग परिग्रह मिथ्यात्व,क्रोध ,मान ,माया, लोभ, हास्य, रति, अरति ,शोक, भय स्त्री ,पुरुष, तथा नपुंसक वेद बाबद विवेचना की।इन सबके त्याग के बाद आकिंचन्य धर्म होगा। आचार्य श्री ने महत्वपूर्ण सूत्र दिया लधुता से प्रभुता मिलती है।आचार्य श्री ने कहा कि पर पदार्थो के प्रति ममत्व भाव को दूर करना चाहिए। जितनी जरूरत है उतने का आकलन परिमाण कर शेष दान देना चाहिए। श्री गजू भैया एवम कैलाश पाटनी ने बताया कि
प्रातः अभिषेक एवम शांति धारा में दश लक्षण पर्व के सौधर्म इंद्र श्री प्रकाश पाटोदी भद्रावती कर्नाटक तथा इंद्र जयकुमार जैन निवाई पुण्य रहे। आचार्य श्री के पंचामृत से चरण प्रक्षालन एवम जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य महावीर जैन,धर्मेंद्र, जितेंद्र, टोंक को प्राप्त हुआ। संगीतमय पूजन अजय पंचोलिया एवम संगीता पाटोदी सनावद ने करवाई।
दशलक्षण पर्व पर अनेक श्रावक श्राविकाएं 16 उपवास दश उपवास 5 उपवास की साधना तप कर रहे है
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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