आत्मा में धर्म के बीजारोपण से मोक्ष रूपी फल मिलेगा
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी
महावीर जी

आज दश लक्षण पर्व का दूसरा दिन मार्दव धर्म का दिन है।
कषाय मुख्य रूप से चार होती है
क्रोध ,मान, माया, ओर लोभ

कल क्रोध को समाप्त करने से क्षमा धर्म प्रगट हुआ, आज मान कषाय को हटाने से मार्दव धर्म प्रगट होगा। यह मार्मिक उद्गार वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने सभागार में महती धर्म सभा मे प्रगट किये। श्री राजकुमार सेठी, श्री राम पाटनी, एवम अभिषेक छाबड़ा ने बताया कि,आज प्रवचन में आचार्य श्री ने 8 प्रकार के मान मद बताए, रूप मद, ज्ञान मद, पूजा मद, बल मद, तप मद, रूप मद। ऐश्वर्य धन मद कुल मद आचार्य श्री ने बताया कि यह सभी मद नश्वर स्थायी नही है इसलिए इनका घमंड अभिमान नही करना चाहिए। इनको हटाने पर ही आत्मा में मृदुता, सहजता, स्वाभिकता ,ओर निरभिमान होगा। पूनम दीदी दीप्ति दीदी राजेश पंचोलिया ने बताया कि
आचार्य श्री ने बताया कि एक वर्ष में 12 माह होते है कभी भारतीय तिथि या माह अनुसार 13 भी होते है। जिस प्रकार मानव जाति में प्रमुख राजा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के रूप में होता है।उसी प्रकार भारतीय भादव माह को सभी महीनों का राजा धार्मिक दृष्टि से माना गया है।क्योंकि भादव माह में बहुत धार्मिक व्रतों के समूह त्योहार पर्व है जैसे सोलहकारण , दश लक्षण पंचमी से चतुर्दसी तक , पुष्पांजलि व्रत पंचमी से नवमी तक सुगंधदशमी व्रत रत्नत्रय व्रत तेरस से पूर्णिमा तक। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री ने बहुत ही सरल भाषा मे उदाहरण में बताया
जिस प्रकार किसान खेत मे कठोर भूमि को हल चला कर जमीन को नरम कर बीज बोता है तब फसल की प्राप्ति होती है ।उसी प्रकार मन आत्मा में मान कषाय को दूर करके आत्मा में जब धर्म रूपी बीजारोपण करेंगे ,तभी हमे आपको मोक्ष रूपी फल की प्राप्ति होगी ।
विनय मोक्ष का द्वार है।
मन को जीतना जरूरी है इससे आत्मा को परमात्मा बनाए जा सकता है।
आचार्य श्री ने पुनः सरल भाषा मे उपदेश में बताया कि जिस प्रकार आप दीपावली पर्व पर पूरे मकान की सफाई रंग रोगन करते है, तब धन रूपी लक्ष्मी आती है,उसी प्रकार यह पर्व भी आध्यात्मिक दीपावली है इन पर्वो में कषायों को क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, त्याग, आकिंचन तथा ब्रह्मचर्य आदि से आत्मा की सफाई कर इन धर्मों से मोक्ष फल रूपी लक्ष्मी प्राप्त कर सकते है।
राजेश पंचोलिया इंदौर
संकलन
अभिषेक लुहाड़िया
