गलती करने के बाद तो क्षमा हर व्यक्ति मांग लेता हैं किंतु असली क्षमा तो वह हैं जो बगैर गलती किये हुए भी मांगी जा सकें सुधासागर महाराज

धर्म

गलती करने के बाद तो क्षमा हर व्यक्ति मांग लेता हैं किंतु असली क्षमा तो वह हैं जो बगैर गलती किये हुए भी मांगी जा सकें सुधासागर महाराज
ललितपुर


क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसमे जहर गरल हो,,, दसलक्षण महापर्व के प्रथम दिवस उत्तम क्षमा पर अपने विशेष प्रवचन माला को अपने शब्दों के मोती पिरोते हुए पूज्य गुरुदेव सुधासागर महाराज ने कहा कि गलती करने के बाद तो क्षमा हर व्यक्ति मांग लेता हैं, किंतु असली क्षमा तो वह हैं जो बगैर गलती किये हुए भी मांगी जा सकें।
उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ उदाहरण देते हुए कहा की जैसे भगवान पारसनाथ को हम उत्तम क्षमा के जीवंत उदाहरण के रूप में समझ सकते हैं।उनकी ओर से कभी कोई गलती नही हुई, और उन्होंने सदा अभय का दान देते हुए क्षमा किया, और स्वयं भी क्षमा भाव धारण किया।
मुनि श्री ने विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सपेरे का साँप यदि किसी व्यक्ति से कहता हैं कि मैने तुम्हे माफ किया तो उसकी इस बात पर हंसी ही आएगी। क्योंकि सपेरे ने तो पहले ही उसके जहर भरे दांतो को तोड़ दिया हैं, अब यदि उसके स्थान पर कोई जंगली कोबरा हो, जिसके दांतो में हलाहल भरा पड़ा हो और हमारे सताने पर वह क्रोधित हो जाये उसके बाबजूद भी वह कह दे कि जाओ हमने तुम्हे माफ् किया तो उसने उत्तम क्षमा धारण की हैं सही मायने में बलवान व्यक्ति के द्वारा मांगी गयी माफी ही उत्तम क्षमा हैं। जो समर्थ है, जिनके पास बल हैं, अटूट सम्पत्ति हैं और राजा बन कर राज कर रहें हैं ऐसे व्यक्ति द्वारा दी गयी क्षमा उत्तम क्षमा हैं।
संस्कार शिविर का दृश्य अलौकिक था
श्रीश जैन ललितपुर से जानकारी देते हुए बताया की शिविर में आज प्रथम दिन जब शिविरार्थी अपनी प्रथम ध्यान कक्षा में बैठे तो दृश्य एकदम अलौकिक था। उस पांडाल में मन्दिम रोशनी के बीच देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे जमीन से तीन फीट ऊपर एक सफेद चादर बिछा दी गयी हो।सभी शिविरार्थी पूज्यवर के दिशानिर्देश का पालन करते हुए ध्यान की अनंत गहराइयों और ऊंचाईयो में गोते लगाते रहे। जब ध्यान की कक्षा खत्म हुई उसके पश्चात सभी शिविरार्थी पंक्ति ब्रद्ध होकर पूजन स्थल पर पहुच गए। जहां समवशरण में विराजमान सभी भगवानो पर शिविरार्थीयो द्वारा अभिषेक शांतिधारा /भक्तिमय पूजन की गयी तत्पश्चात पूज्य मुनि श्री के प्रवचनों के श्रवण के लिये। शिविरार्थी नए पांडाल की ओर बढ़ गए।
ध्वजा की पताका ने सफल होने की घोषणा कर दी
शिविर पुण्यार्जक परिवार द्वारा ध्वजारोहण किया गया। जिसकी ध्वजा ने उत्तरोत्तर लहराकर शिविर के सफल होने की उद्घोषणा कर दी ,, सभी परिवार जनों को ढेर सारा आशीर्वाद देते हुए मुनिराज हर्षित भावो से उस विहंगम द्रश्य को देखने लगे। जो पिछले तीन वर्षों बाद दिखाई दिया हैं। यह ललितपुर का सौभाग्य हैं कि उसे प्रथम शिविर लगाने के बाद विगत दो वर्षों से अवरोधित शिविर के पुनः आरम्भ होने का सौभाग्य मिला है। आज ललितपुर के सभी श्रावक बहुत खुश हैं क्योंकि वे जानते हैं शिविर के शिविरार्थियों के आहार व्यवस्था में अपनी सेवाएं देकर वे भी शिविर के समूचे पूण्य को पा सकते हैं।
पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद आप सभी को सदा मिलता रहे।
श्रीश जैन ललितपुर से प्राप्त जानकारी
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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