त्याग करने वाला महान बनता है आर्यिका विज्ञाश्री

धर्म

त्याग करने वाला महान बनता है आर्यिका विज्ञाश्री
निवाई

भारत  गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी के पावन सानिध्य में निवाई में चल रहे 48 दिवसीय श्री जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान में प्रातः अभिषेक, शांतिधारा , अष्टद्रव्यों से पूजा के बाद विधानमंडल की पूजा हुई


जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि कार्यक्रम में आज गोपाल, शम्भूदयाल जी कठमाणा परिवार एवं पदमचंद बहड़ वाले जैन परिवार ने विधान में पूजा अर्चना कर पुण्यार्जन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंतर्गत आर्यिका श्री ने भरी धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि विवेक ही परम ज्ञान है, विवेक ही परम धर्म है,विवेक से‌ सभी कार्यों की सिद्धि सहजता से हो सकती है, भारत तो है ही त्याग प्रधान देश त्यागी जन शनैः शनैः पृथ्वी के‌ कण-कण का त्याग करते जाते हैं जो त्याग करते जाते हैं, वे‌ पूज्य होते जाते हैं और जो जोड़ते जाते हैं वे अन्त में‌ डूब जाते हैं। यह हमारी भारतीय संस्कृति है। यहाँ त्याग करने‌ वाला महान बन जाता है, जोड़ने वाला डूब जाता है त्याग करने से हमारी आत्मा पवित्र हो जाती है।‌ अपनी इच्छाओं पर कन्ट्रोल करके त्याग का भाव बनाओ थोड़ा-थोड़ा त्याग अवश्य करना चाहिये ताकि हमारी आत्मा भार से हल्की होकर ऊँचाई को प्राप्त कर सके‌ जिस प्रकार बादल पानी को छोड़ता है, बरसाता है तो ऊँचाई पर है, एवं समुद्र ग्रहण करता है तो नीचे एवं खारा‌ रहता है। उसी प्रकार त्याग करने वाला दान करने वाला स्वर्ग व मोक्ष की ऊँचाई प्राप्त करता है तथा धन को जोड़कर रखने वाला नरक निगोद में जाकर कष्ट भोगता है। अतः छोड़ना सीखो, जोड़ना नहीं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

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