अनिश्चय की स्थिति में आने वाले विचार अंतर्रात्मा की आवाज नहीं है। मुनि श्रमण सागर जी

धर्म

अनिश्चय की स्थिति में आने वाले विचार अंतर्रात्मा की आवाज नहीं है। मुनि श्रमण सागर जी
राघौगढ़ 13 अक्टूबर।

 

 

इस सदी के महान दिगंबर संत आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, औजस्वी वक्ता, महा तपस्वी, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने विद्यासागर सभागार राघौगढ़ में मंगलवार को “अंतर्रात्मा की आवाज पहचानो” विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा जब आप अनिश्चय की स्थिति में होते हैं तब आंखें बंद कर भगवान का स्मरण कर यह विचार करते हैं कि मुझे इस समस्या पर किस निर्णय पर पहुंचना चाहिए। उस समय जो बात बुद्धि से आती है उसे हम अंतर्रात्मा की आवाज कहने लगे हैं। मुनिराज ने कहा जैन दर्शन के अनुसार अंतर्रात्मा की आवाज का कहीं उल्लेख नहीं है। अंतर्रात्मा की आवाज मानकर हम निर्णय ले लेते हैं। अनिश्चय की स्थिति में मन में जो विचार आता है वह विचार अनेक बार सत्य नहीं निकलता है।

 

 

 

आपने आचार्य समंत भद्र स्वामी द्वारा रचित रत्न करंड श्रावकाचार ग्रंथ का उल्लेख करते हुए कहा आपके जीवन में चार स्थिति ऐसी आती हैं जब आप किसी समस्या पर निर्णय नहीं ले पाते हैं। वे चार कारण हैं भय के कारण, आशा के कारण, स्नेह के कारण और लोभ के कारण हम अनिश्चय की स्थिति में पहुंच जाते हैं। और भगवान को स्मरण कर आंख बंद कर यह प्रार्थना करते है कि इस समस्या पर में क्या निर्णय लूं। उसे समय बुद्धि से जो विचार आते हैं उसे हम अंतर्रात्मा की आवाज कहने लगे हैं। उदाहरण देते हुए बताया तीन चोर थे पहले ने कहा बैंक में चोरी करो, दूसरे ने कहा राजमहल में चोरी करो, तीसरे ने कहा सेठ जी के घर में चोरी करो। यह निर्णय नहीं कर पाए कि तीनों को मिलकर कहां चोरी करने चलना है तीनों अलग-अलग चोरी करने गए। पहला बैंक में पहुंचा तो वहां सी सी टीवी कैमरे लगे हुए थे उसने आंख बंद कर भगवान का स्मरण कर पूछा कि मुझे क्या करना चाहिए अंदर से आवाज आई कि तू चोरी मत कर, इसके बाद भी उसने चोरी की और वह सफल रहा। दूसरे ने राजमहल पर पहुंचकर आंख बंद कर विचार किया कि क्या करना चाहिए अंदर से आवाज आई की चोरी कर तू सफल हो जाएगा। और वह सफल हो गया।तीसरा सेठ जी के निवास पर पहुंचा यह विचार कर रहा था की चोरी करूं या न करूं उसने कथित अंतर्रात्मा से पूछा कि क्या निर्णय लूं। कथित अंतर्रात्मा से आवाज आई कि तू चोरी मत कर पकड़ा जाएगा ‌ उसने चोरी की और वह पकड़ा गया। तीन उदाहरणों से यह सिद्ध होता है कि हम जिसे अंतर्रात्मा की आवाज कहते हैं यह सही साबित नहीं होती है।

 

 

टीवी सीरियल कौंन बनेगा करोड़पति का एक उदाहरण देते हुए बताया हॉट सीट पर एक महिला ने सभी प्रश्नों के सही उत्तर देते हुए 50 लाख रुपए जीत लिए थे। अब अंतिम प्रश्न एक करोड रुपए का अमिताभ बच्चन को रखना था। प्रश्न रखने से पूर्व अमिताभ बच्चन ने उस महिला से कहा अब आपकी चारों लाइफ लाइन समाप्त हो गई हैं। आप विचार करें अगले प्रश्न का उत्तर दे पाएंगी या नहीं अगर अगले प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाए तो आप अभी खेल को छोड़ सकती हैं। 50 लाख रुपए आपको मिलेंगे। और अगर आपने प्रश्न का गलत उत्तर दिया तो आप नीचे चली जाएंगी और मात्र आपको₹10000 ही मिलेंगे। महिला ने कथित अंतर्रात्मा से जानना चाहा है कि क्या निर्णय लूं। मन में विचार आया की अगले प्रश्न का उत्तर दो, तुम एक करोड रुपए जीतोगी। उस महिला ने अगले प्रश्न का जो उत्तर दिया वह गलत था और उसे मात्र ₹10000 मिले।शरीर के अंदर से निकलने वाली बात अगर अंतरात्मा की आवाज नहीं है तो फिर वह क्या है। इसका उत्तर देते हुए मुनिराज ने कहा जैन दर्शन मैं अंतर्रात्मा की आवाज का उल्लेख नहीं है यह हमारा मात्रा भ्रम है। हमारे कर्मों के फल के अनुसार अगर आने वाला समय सुख शांति का है तो समस्या के हल के लिए विचार सकारात्मक आएंगे और आने वाले कर्म दुख देने वाले हैं तो समस्या के समाधान में विचार नकारात्मक ही आएंगे। अंदर से आने वाली आवाज को हम अंतर्रात्मा की आवाज न कहकर कर्म कृत आवाज कहते हैं। आगे सुख या दुख जीवन में लिखा है तो उस अनुसार ही हमारी बुद्धि चलेगी।

 

 

 

प्रवचन के अंत में मुनि श्रवण सागर जी महाराज ने दीक्षा गुरु आचार्य विद्यासागर जी महाराज को सभी समर्पित स्वरचित कविता सुनाई कविता का शीर्षक है “सदा सत्य की बात बताते, सबको सम्यक राह दिखाते।

 

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

 

 

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