चलती गाड़ी पर ही उड़ती है धूल” — आलोचनाओं से नहीं, लक्ष्य से जुड़ें : मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज

धर्म

चलती गाड़ी पर ही उड़ती है धूल” — आलोचनाओं से नहीं, लक्ष्य से जुड़ें : मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज
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“आलोचक नहीं, अनुमोदक बनें; अच्छे कार्यों में विघ्न नहीं, प्रेरणा दें — निंदा नहीं, सराहना ही आत्मकल्याण का सच्चा मार्ग”
विदिशा।
ऑनलाइन संध्याकालीन शंका समाधान कार्यक्रम में पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में सक्रिय लोगों को आलोचनाओं और विघ्नों से कभी घबराना नहीं चाहिए। यदि मार्ग में कुछ विघ्नसंतोषी न हों तो कार्यकर्ता भी पूरी तरह सजग नहीं रह सकता। इसलिए आलोचनाओं से विचलित होने के बजाय अपने लक्ष्य पर अडिग रहकर आगे बढ़ना ही सफलता का मंत्र है।

 

 

मुनि श्री ने अत्यंत सारगर्भित उदाहरण देते हुए कहा, “जैसे चलती हुई गाड़ी के साथ धूल और धुआँ भी उठता है, वैसे ही बड़े और श्रेष्ठ कार्यों के साथ आलोचनाएँ भी स्वाभाविक रूप से जुड़ी रहती हैं।” बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति अपना ध्यान गाड़ी की गति पर रखे, पीछे उठने वाली धूल और धुएँ पर नहीं। उन्होंने कहा कि जो लोग भ्रम, विवाद और नकारात्मकता फैलाते हैं, उन्हें धुआँ फैलाने के बजाय समाज में सद्भाव, सहयोग और सुगंध फैलाने का प्रयास करना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि निरंतर दोष-दर्शन और आलोचना करने वाला व्यक्ति अपना वर्तमान और भविष्य दोनों बिगाड़ लेता है। नकारात्मक सोच उसके विचार, व्यवहार, संबंध और व्यक्तित्व को प्रभावित करती है। ऐसे लोग जीवन में कोई सार्थक उपलब्धि प्राप्त नहीं कर पाते और उनका अधिकांश समय केवल प्रतिक्रियाओं में ही व्यतीत हो जाता है।

 

मुनि श्री ने स्पष्ट कहा कि “किसी भी श्रेष्ठ कार्य की अनुमोदना करने वाला पुण्य का भागी बनता है, जबकि बिना कारण उसकी आलोचना करने वाला पाप का भागी होता है।” इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को आलोचक बनने के बजाय अनुमोदक बनने का प्रयास करना चाहिए। दूसरों के श्रेष्ठ कार्यों की सराहना आत्मकल्याण का मार्ग है, जबकि निरंतर निंदा और आलोचना आत्मा को कलुषित करती है।

 

उन्होंने सभी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे आलोचनाओं से विचलित हुए बिना अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें तथा समाज में सकारात्मक सोच, सहयोग और सद्भाव का वातावरण निर्मित करें।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे अभिषेक, शांतिधारा एवं प्रवचन तथा सायंकाल 6:20 बजे ऑनलाइन शंका समाधान कार्यक्रम का आयोजन नियमित रूप से किया जा रहा है।

 


🖋️ संकलन:
अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
📞 9929747312

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