सुधासागर महाराज सबसे बड़े धुरंधर, उनमें आचार्य विद्यासागर महाराज के संस्कार और तेज दिखाई देता है: विहर्षसागर महाराज

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सुधासागर महाराज सबसे बड़े धुरंधर, उनमें आचार्य विद्यासागर महाराज के संस्कार और तेज दिखाई देता है: विहर्षसागर महाराज

ज्ञानोदय तीर्थ नारेली में भावपूर्ण उद्बोधन, सुधासागर महाराज के व्यक्तित्व और नारेली तीर्थ की भव्यता की मुक्तकंठ से सराहना

अजमेर।

ज्ञानोदय तीर्थ, नारेली में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य आचार्य श्री 108 विहर्षसागर महाराज ने मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज के व्यक्तित्व और उनके धर्मकार्य की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि सुधासागर महाराज अकेले इतने विशाल कार्य कर रहे हैं, वे उनके आध्यात्मिक सामर्थ्य को नहीं समझते। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि “ऐसा प्रतीत होता है मानो आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की आत्मा और उनके संस्कार सुधासागर महाराज में प्रवाहित हो रहे हों।”

 

 

अपने उद्बोधन में विहर्षसागर महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की समाधि के बाद उनके यश और कीर्ति का जिस प्रकार विस्तार हुआ है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि अब गुरु और शिष्य—दोनों का गौरव एक साथ समाज को आलोकित कर रहा है।

     

उन्होंने कहा कि नारेली जैसा अद्भुत और भव्य तीर्थ केवल सुधासागर महाराज जैसे दूरदर्शी संत की प्रेरणा से ही साकार हो सकता है। तीर्थ का अवलोकन करने के बाद उन्होंने इसकी भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक अतिशय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि इसे ‘द्वारिका नगरी’ की संज्ञा भी दी जा सकती है।

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उन्होंने इस उपमा का आशय स्पष्ट करते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की द्वारिका में समृद्धि और दूध की नदियों का वर्णन मिलता है, उसी प्रकार नारेली तीर्थ में सैकड़ों गौवंश की सेवा के माध्यम से समृद्ध गौशाला संचालित हो रही है, जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दुग्ध उत्पादन होता है।

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विहर्षसागर महाराज ने यह भी कहा कि यहां निर्मित अनेक मंदिर ऐसे हैं, जिनका निर्माण एक-एक दानदाता के सहयोग से हुआ है। इसी संदर्भ में उन्होंने स्नेहपूर्वक सुधासागर महाराज को “लक्ष्मीपुत्र” की संज्ञा देते हुए कहा कि जहां उनके चरण पड़ते हैं, वहां धर्मकार्य सहज गति से पूर्ण होते चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक स्थानों पर लोग कहते हैं—”सुधासागर महाराज को बुलाइए, हमारा तीर्थ भी बन जाएगा।”

धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने विहर्षसागर महाराज के प्रेरणादायी एवं भावपूर्ण उद्बोधन को श्रद्धापूर्वक सुना।

संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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