चांदखेडी पंचकल्याणक:
नीलांजना नृत्य को देख युवराज ऋषभदेव को हुआ वैराग्य
चाँदखेड़ी
विश्व प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र चांदखेडी मे संतशिरोमणी आचार्य भगवान् विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज एवं प. पू. मुनि श्री 108 प्रसाद सागर जी महाराज सहित कुल 9 मुनिराजो के ससंघ सानिध्य मे श्री मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मे शुक्रवार को तपकल्याण क्रिया हुई। जिसमें युवराज ऋषभदेव का विवाह महारानी नंदा एवं सुनंदा से हुआ। और फिर एक दिन राजा नाभिराय ने शुभ मुहूर्त घड़ी देखकर युवराज ऋषभदेव का राज्याभिषेक किया। देवराज इन्द्र स्वर्ग से नये वस्त्र आभूषण लेकर अयोध्या पहुँचते है। और युवराज को वस्त्राभूषण भेट करते है। और भरतखंड के नवीन चक्रवर्ती सम्राट ऋषभदेव के राज्याभिषेक के अवसर पर आर्यखंड के सभी 32000 राज्यों के महाराजा हीरे जवाहरात की भेट लेकर अयोध्या नगरी मे पधारते है। और फिर महाराज आदिनाथ के परिवार बढता है। और उनके पुत्रो युवराज बाहुबली एवं भरत एवं पुत्रिया राजकुमारी ब्राह्मी एवं सुंदरी का जन्म होता है। जिनको भगवान अदिनाथ अक्षर एवं गिनती सिखलाते है। चूंकि भोगभूमि का अंत होकर कर्म भूमि काल की शुरूआत होती है। अतः जैसे पूर्वकाल मे प्रजा भोजन इत्यादि सुविधाओ के लिए कल्पवृक्ष पर निर्भर रहती थी। वह काल समाप्ति की ओर था। अब कल्पवृक्ष क्षीण होने से प्रजाजन अपना दुखडा लेकर महाराज ऋषभदेव दरबार पहुँचते है। महाराज ऋषभदेव ने प्रजा को बैलो से कृषि, अक्षर गिनती से लिखना-पढना, बही खाता, नापना-तोलना, राज्य व्यवस्था के मंत्रिमंडल की व्यवस्थाए, दंड व्यवस्था, स्वयं की सुरक्षा करना, भोजन बनाने, खौदने के औजारों से घर बनाने इत्यादि का ज्ञान दिया। पुत्री ब्राह्मी द्वारा सभी भाषा ज्ञान को लिपिबद्ध किया गया। और वही से उसके नाम से ब्राह्मी लिपि का उदगम हुआ। और अनुज पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत को शासन संचालन इत्यादि का ज्ञान दिया। बाद मे योवन अवस्था मे दोनो पुत्रियो ने विवाह प्रस्ताव ठुकराकर आजीवन बह्मचर्य व्रत धारण किए। और महाराज ने दोनो पुत्रो का विवाह किया। महाराज के दरबार मे एक दिन भरी सभा मे नीलांजना नाम की नर्तकी नृत्य कर रही थी। और उसी बीच नर्तकी के प्राण-पखेरू उड़ जाते है। किंतु देवराज इन्द्र अपनी लीला से उसी स्थान पर उसी क्षण नर्तकी भेज देते है। किंतु भगवान को पता चल जाता है। और मनपर्याय ज्ञान एवं अवधिज्ञान उत्पन्न होकर वैराग्य हो जाता है। और अपना सारा राजपाट पुत्रो बाहुबली एवं भरत को संभलाकर मुनि बनने को निकल जाते है। उनके माता-पिता एवं परिवारजन उनको लाख समझाते है किंतु वह वन की ओर विहार कर जाते है। लाखो राजा- प्रजा भी उनके साथ वैराग्य पथ पर प्रस्थान कर जाते है। तत्पश्चात मुनि श्री की दिव्य देशना होती है।
दीक्षा का संस्कार किया मुनि श्री ने

क्रिया को संपादित करते हुए तप कल्याण की क्रिया करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने महाराज ऋषभदेव को मुनि दीक्षा दी और वह मुनि वृषभ सागर जी बन जाते है। उनको प्रथम पीछी देने का सौभाग्य उनके माता-पिता बने परिवार को प्राप्त हुआ। और वृषभसागर मुनिराज ने पीछी कमण्डल धारण किए।
वहीं सन्ध्या बेला में शाम को गजरथ से पधारे पुण्यार्जक परिवारो ने महाआरती की। और सांस्कृतिक कार्यक्रम मे पर धार्मिक नाटिका का मंचन किया गया।

शनिवार को ज्ञानकल्याण महोत्सव मनाया जाएगा
शनिवार की बेला में केवल ज्ञानकल्याण महोत्सव मनाया जाएगा जिसमे राजा श्रेयांस परिवार सहित को मुनि आदिनाथ को मुनिचर्या के 6 माह बाद ईक्षु रस से प्रथम आहार देने का पुण्य अवसर प्राप्त करेंगे।
समापन बेला में राजे लेगी धर्मलाभ व मुनि संघ का आशीर्वाद
पंचकल्याण के अंतिम दिन रविवार को राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमति वसुंधरा राजे सिंधिया धर्मलाभ एवं मुनि संघ का आशीर्वाद लेने चांदखेडी आएगी। व मोक्षकल्याण की क्रिया को देखेगी।
इस आयोजन सीधा प्रसारण पारस, जिनवाणी, सुधाकलश, आदिनाथ एवं सभी मुख्य चैनल पर चल रहा है। यह जानकारी क्षेत्र अध्यक्ष हुकम काका एवं भगवान स्वरूप जैन देवरी, कैलाश भाल, महावीर जैन कालू, प्रशांत जैन, योगेश जैन जीवदया ने दी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
