मंदसौर में योग क्रांति : मुनि श्री प्रणम्य सागरजी के सान्निध्य में ‘अर्हम ध्यान योग’ रचेगा नया इतिहास

धर्म

मंदसौर में योग क्रांति : मुनि श्री प्रणम्य सागरजी के सान्निध्य में ‘अर्हम ध्यान योग’ रचेगा नया इतिहास

मंदसौर 

मालवा की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरा मंदसौर, आगामी 21 जून 2026, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एक ऐसे वैश्विक अनुष्ठान की साक्षी बनने जा रही है, जो यहाँ के जन-जीवन को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से रूपांतरित कर देगा। योग दिवस का यह महा आयोजन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, जिला प्रशासन एवं सकल जैन समाज द्वारा विराट रूप में विशेष आकर्षणों के साथ किया जा रहा है। यह अपूर्व अवसर मन्दसौर के लिए महान उपलब्धि के साथ ही विशेष गौरव का विषय भी है कि यह महामुनि पूज्य 108 प्रणम्यसागरजी महाराज द्वारा वर्ष 2015 के स्थानीय वर्षावास के दौरान ही आप स्वयं द्वारा इस ‘अर्हम ध्यान योग’ का बीज रूप में प्रारम्भ किया गया था; जिसने अब मात्र ग्यारह वर्षों की अनवरत साधना, निस्वार्थ सेवा और उच्च संस्कारों की गौरवशाली यात्रा से विशाल वटवृक्ष का रूप ले लिया है। कई महानगरों, शहरों और अन्य 14 देशों तक विस्तार के बाद अब अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक विशाल अर्ह ध्यान योग महाकुंभ’ का आयोजन यहां की पुण्यधरा पर हो रहा है।

 

 

 

नूतन स्टेडियम के विस्तीर्ण प्रांगण में जब हजारों साधक एक साथ, एक लय और एक श्वास में योग करेंगे, तो वह केवल शारीरिक मुद्राओं का प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि वह मंदसौर की सामूहिक चेतना के जागरण का ऐतिहासिक क्षण होगा। इस संपूर्ण आयोजन के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत कोई और नहीं, बल्कि दिगंबर जैन परंपरा के प्रखर मनीषी, अध्यात्म सरोवर के राजहंस, ध्यान-योगी परम पूज्य अहँ योग प्रणेता 108मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज हैं। 

 

 

दिगंबर संत परंपरा और योग का प्राचीन अंतर्संबंध

जब हम योग की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान केवल शारीरिक आसनों तक सीमित रह जाता है। किंतु भारतीय श्रमण संस्कृति और दिगंबर जैन संत परंपरा में योग को ‘आत्म-अनुशासन’ और ‘कर्मों के क्षय’ का सर्वोत्कृष्ट माध्यम माना गया है। आचार्य कुंदकुंद से लेकर आचार्य पूज्यपाद, आचार्य शुभचन्द्र और आधुनिक युग में आचार्य विद्यासागर जी महाराज तक, संतों ने कायोत्सर्ग, अंतर्यात्रा और आत्म-ध्यान को ही वास्तविक योग कहा है। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज इसी

महान और निष्कलंक संत परंपरा के संवाहक हैं। आपकी चर्चा, आपकी तपस्या और आपका वैज्ञानिक दृष्टिकोण आज के आधुनिक समाज को प्राचीन अध्यात्म से जोड़ने का एक जीवंत सेतु है। आपने मानवता को बताया कि योग का मतलब केवल शरीर संचालन और शारीरिक स्वास्थ्य समझना अधूरा ज्ञान है; योग का सम्बन्ध चित्तवृत्ति को रोकने से है, यह समझना भी पूर्ण ज्ञान न होकर सीमित ज्ञान से है; वस्तुतः योग का सम्बंध अपने पूर्व अर्जित कर्मों और संस्कारों से छुटकारा प्राप्त करके आत्मा को पूर्ण आनंद, पूर्ण ज्ञान और पूर्ण शक्ति का अनुभव कराने से है…। आपके ही पावन निर्देशन में विकसित हुआ ‘अहम ध्यान योग’ आज जाति, वर्ग और संप्रदाय की सीमाओं को लांघकर संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.

 

 

 

क्या है ‘अर्हम ध्यान योग’?

 

अर्हम ध्यान योग केवल कुछ क्रियाओं का समुच्चय नहीं है; यह जैन दर्शन के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक ध्यान पद्धति है।इसमें न सिर्फ योग को लिया गया है, अपितु ‘स्व में विराम, स्व में विश्राम द्वारा अर्हम प्राणायाम’ और ध्यान भी इसमें सम्मिलित है। यह योग शरीर, मन, और आत्मा के समग्र विकास पर केंद्रित है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति प्रदान करता है। योग के इस रूप में शारीरिक व्यायाम,, सूक्ष्म व्यायाम, अर्हम तकनीक और ध्यान पद्धतियों का संयोजन शामिल है। अर्हम (औहरा): यह शब्द स्वयं में अनंत ऊर्जा, पवित्रता के साथ परमेष्टियों की शक्ति को अपने मे समाहित किये हुए है।Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.

 

मंत्र, मुद्रा और श्वांस का समन्वयः

 ॐ अहँ नमः’ के इस महामंत्र द्वारा पंच नमस्कार मुद्रा से श्वासं संयोजन किया जाता है। (ऑम) Power + (अहं) Purity = Peace (परमशान्ति)। इस पद्धति में विशिष्ट मंत्र ध्वनियों (Sound Vibrations), हस्त मुद्राओं और प्राणायाम के वैज्ञानिक संयोजन से शरीर के चक्रों को संतुलित किया जाता है। तनाव मुक्ति और सकारात्मकताः आज का मनुष्य अवसाद, अनिश्चितता और मानसिक तनाव से जूझ रहा है। मुनिराज द्वारा निर्देशित यह योग पद्धति सीधे हमारे न्यूरोलॉजिकल सिस्टम और अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) पर सकारात्मक प्रभाव डालती है. जिससे मन तत्क्षण शांत और स्थिर हो जाता है। मुनिराज का स्पष्ट संदेश है कि योग किसी धर्म विशेष का नहीं, बल्कि स्वयं को जानने का विज्ञान है। यही कारण है कि ‘अर्हम ध्यान योग’ आज हर वर्ग के युवा, वृद्ध और प्रबुद्ध जनोंके बीच अत्यंत लोकप्रिय हो रहा है। ‘अहं का विसर्जन और स्वयं का सृजन’ के ध्येय वाक्य के साथ जो साधक 21 जून को एक बार उपस्थित होकर इस अनुपम लाभ को महसूस करेगा, पूर्वानुभव बताता है कि वह व्यक्ति आगे इसी राह पर गहरी साधना, जिसमें भाव एकाग्रता, चित्त शुद्धि, आध्यात्मिक भावनाएं, यम-नियम, आसन, जप, निर्विकल्प ध्यान, योग और आहार आदि वैज्ञानिक पद्धतियों के आनंदकारी लाभ की ओर स्वयं अग्रसर होता है।Collage: woman with red petals on left, decorative diya on right, Hindi text about astrology and a phone number for advice.

 

 

मंदसौर, नीमच, जावरा और संपूर्ण अंचल में उत्साह की लहर

 

इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर न केवल मंदसौर शहर, बल्कि दलौदा, पिपलियामंडी, शामगढ़, गरोठ, सुवासरा, सीतामऊ, जावरा सहित पडोसी जिले नीमच और रतलाम तक के योग प्रेमियों और श्रावकों में अपूर्व उत्साह है। अंचल की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक और शैक्षणिक संस्थाएं स्वतः स्फूर्त होकर इस महा अभियान से जुड रही हैं। बारह वर्षों कीं इस यात्रा में मुनि संघ ने समाज को जो संस्कार दिए हैं, यह उत्सव उसी कृतज्ञता को ज्ञापित करने का माध्यम है। नूतन स्टेडियम में होने वाला यह आयोजन मंदसौर को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाएगा।

 

Promotional poster in Hindi advertising a namkeen snack startup; silhouettes at sunset and bowls of mixed fried snacks with contact numbers.

स्वास्थ्य, शांति, साधना और सकारात्मकता का चतुष्कोणीय संकल्प

21 जून की सुबह जब सूर्य की प्रथम किरणें मंदसौर की धरा को छुएंगी, तब नूतन स्टेडियम में उपस्थित प्रत्येक साधक चार स्तंभों पर आधारित एक नए जीवन का संकल्प लेगाः 

 

1. स्वास्थ्य (Health): योग के माध्यम से शरीर को निरोगी और ओजस्वी बनाना।

 

2. शांति (झशरलश): कोलाहलपूर्ण जीवन में आंतरिक स्थिरता और मानसिक शांति की खोज।

 

3. साधना (sadhna) : दैनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच स्वयं के आत्म-स्वरूप को पहचानना। 4. सकारात्मकता (Positivity) : विचारों को शुद्ध कर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना।

 

Smiling man on the left with a sunrise over mountains; Hindi quote reads: 'जिनने धैर्य सीख लिया, उसने जीत का रास्ता पाया'.

आह्वान : आइए, इतिहास रचें!

 

यह आयोजन किसी एक संस्था या समाज का नहीं है, यह पूरे मंदसौर अंचल का अपना है। जब देश-विदेश में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की गूंज होगी, तब मंदसौर के नूतन स्टेडियम से निकलने वाली ‘अर्हम’ की ध्वनियां संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर रही होंगी। तपस्वी दिगंबर मुनिराज के पावन सानिध्य का यह दुर्लभ सुअवसर बार-बार नहीं मिलता। तो आइए, आगामी 21 जून को प्रातः 5.30 बजे से अपने परिवार, मित्रों और परिचितों के साथ नूतन स्टेडियम पहुंचे। उठिए, कदम बढ़ाएं और मंदसौर के इस स्वर्णिम इतिहास के साक्षी ही नहीं, बल्कि इसके सहभागी बनें। चलिए योग करें, और भीतर से रूपांतरित हों, यही निवेदन

     प्रोफेसर डॉक्टर अशोक अग्रवाल से प्राप्त आलेख 

     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *