अथाह भीड़ की आपाधापी में, अपना कोई नहीं होता..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
जालिमपुर बांसवाड़ा राजस्थान।
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिक्षा भुमी परतापुर से पुष्पगिरी की और चल रही है उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि हमने अपनों को जितना समय दिया है, काश उसका केवल 10% समय भी स्वयं को दिया होता, तो शायद मनुष्य इतना दु:खी, परेशान और डिप्रेशन का शिकार न होता। जीवन के दो मार्ग हैं — एक भीतर का मार्ग, दूसरा बाहर का मार्ग।

भीतर के मार्ग में सुख है, शांति है, आनंद है, बहार है। वहाँ हर दिन एक उत्सव है, हर क्षण एक त्योहार है।
बाहर के मार्ग में — दुःख, परेशानी, टेंशन, उलझन और केवल भागमभाग है। जहाँ न कोई स्पष्ट लक्ष्य है, न कोई मंज़िल।
यह जीवन मानो कोल्हू के बैल की यात्रा बन गया है — चलना तो लगातार हो रहा है, पर पहुँचना कहीं भी नहीं हो पा रहा। 
आज का मनुष्य ना अपनों से, ना अपने कार्यों से खुश हैं, और ना संतुष्ट। जिससे भी बात करो या पूछो — बाबू, क्या आप अपने व्यापार से खुश हैं-? उत्तर प्रायः “नहीं” ही मिलता है। नौकरी करने वाले से पूछो — क्या आप अपने कार्य से संतुष्ट हैं-? वहाँ भी वही असंतोष। बच्चों से पूछो — क्या पढ़ाई में आनंद आता है-? पति से पूछो — क्या आप अपनी पत्नी से खुश हैं-? पत्नी से पूछो — क्या आप अपने पति से संतुष्ट हैं-? सास बहू से खुश नहीं, बहू सास से प्रसन्न नहीं। कहने का मतलब है — जीवन सब जी रहे हैं, परन्तु कोई भी न स्वयं से खुश है, न संतुष्ट । इतनी मेहनत, इतना संघर्ष, इतना धन कमाने के बाद भी — मन में केवल अफसोस और असंतोष क्यों है-? यदि आप किसी से पूछो — आपके जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या है-? तो अधिकतर लोगों के पास कोई उत्तर नहीं होता। यदि पूछो — कितने करोड़ रुपये कमाने के बाद आप सुख और शांति से जीवन जी पाएँगे-? तो वहाँ भी मौन ही मिलता है।

आप स्वयं विचार करना — जब धन कम था, तब सुख अधिक था या आज धन बढ़ने के साथ दुःख भी बढ़ गए हैं-? पहले का मनुष्य अभाव में भी सुखी था, आज का मनुष्य सद्भाव और साधनों के बीच भी दु:खी और परेशान है । हर व्यक्ति अपने जीवन और अपने ही मन से संघर्ष कर रहा है। न कोई स्पष्ट उत्तर है, न कहीं स्थायी समाधान। सिर्फ समझदारी, आत्मचिंतन और संतोष ही जीवन का वास्तविक समाधान हैं। अन्यथः ऐसे ही न जाने कितनी ज़िंदगियाँ जी ली जाएँगी, पर समस्या वही रहेगी, परेशानी वही रहेगी, और मन की अशांति भी वैसी ही बनी रहेगी…!!!

आज अंतर्मना-अहिंसा-संस्कार पदयात्रा दिशा-दाहोद, झाबुआँ, बदनावर,थांदला, पेटलावद, तपोभूमि उज्जैन, पार्श्वनाथतीर्थ,सोनकच्छ,पुष्पगिरी तीर्थ क्षेत्र} परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ का भव्य मंगल पद विहार दिनाँक 11 जून 2026, गुरुवार सुबह को 5.30 बजे भारत निर्माण राजीव गाँधी, सेवाकेन्द्र, ओर सरकारी हाई सैकण्डरी विघालय,ग्राम पंचायत डूँगरी पाडा, जिला बाँसवाडा राजस्थान से पी एम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विघालय, जालिमपुरा, जिला बाँसवाडा राजस्थान 13 किलोमीटर के लिए होगा
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
