शिविर का समापनश्रीमुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में शिविर, 215 विद्वान आए
शिक्षा से इंसान की सोच और जीवन बदलता है, नई पीढ़ी को संस्कार देना जरूरी स्वास्तिभूषण: माताजी
केशवरायपाटन
श्रीमुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में चल रहे छह दिवसीय अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर का शनिवार को समापन हो गया। इसमें देश और प्रदेश के 215 शास्त्री और विद्वानों ने भाग लिया। शिविर में संस्कारों पर जोर दिया गया।

माताजी ने कहा कि शिक्षा हमारे जीवन में हमारी सोच, विचार, भोजन और रहन-सहन सभी को बदल देती है। यदि बच्चों को पाठशाला के माध्यम से धार्मिक संस्कार दिए जाए तो आने वाले पीढ़ी धार्मिक और संस्कारवान बनेगी। उन्होंने कहा कि एक विद्वान पूरे गांव को ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित कर सकता है। प्रबंधक कार्यकारिणी कमेटी के अध्यक्ष गुलाबचंद जैन (चूना वाले) और कार्यकारिणी ने देशभर से आए शास्त्रियों और विद्वानों का स्वागत किया।
बचपन में दिए जाते हैं संस्कार
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांश बड़ौत ने कहा कि ऐसे आयोजन देशभर में अलग-अलग स्थानों पर किए जाते हैं। इससे नई पीढ़ी को काफी लाभ मिलता है और संस्कार बचपन से ही दिए जाने चाहिए। शास्त्री परिषद द्वारा योग्य विद्वानों को प्रतिष्ठाचार्य, विधानाचार्य आदि मानक उपाधियों से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रबंध कार्यकारिणी कमेटी और सकल जैन समाज की ओर से अतिशय क्षेत्र में चातुर्मास के लिए माताजी को श्रीफल भेंट किया गया।

नॉलेज यह है शिविर का मकसद
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद के शिक्षण-प्रशिक्षण शिविरों का मुख्य उद्देश्य जैन समाज के विद्वानों, शास्त्रियों और युवा पीढ़ी को धार्मिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक रूप से कुशल बनाना है। इन शिविरों के माध्यम से प्रतिभाएं व विद्वान एक मंच पर एकत्रित होते हैं। जिससे वैचारिक आदान-प्रदान और नए शिक्षण तरीकों को सीखने का अवसर मिलता है। इसका एक बड़ा लक्ष्य यह भी है कि ये विद्वान अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर पाठशालाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को बचपन से ही धार्मिक संस्कार दे सकें, ताकि वे सामाजिक और नैतिक रूप से मजबूत बनें।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
