रत्न्त्रय धर्म 13 प्रकार का चारित्र 14 वे गुण स्थान पहुंचने का माध्यम है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
जयपुर
श्री चन्द्र प्रभ जिनालय बड़ के बालाजी में संघ सहित विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा दिया गया संवाद, गीत और धर्म-ज्ञान अत्यंत प्रेरणादायक रहापाठशाला में आए बड़े बच्चों को गीत, संवाद और अंक-ज्ञान के माध्यम से जैन सिद्धांतों का सरल एवं सुंदर ज्ञान कराया गया। मंदिर में प्रभु दर्शन की विधि गीत के माध्यम से बताई।मंदिर धर्म सभा में नंगे पैर जाना चाहिए भगवान के सामने प्रेमभाव से पंचांग साष्टांग शीश झुकाकर,गंधोदक-क्षीर ओर माथे तिलक लगाएँ ,अभिषेक , पूजन, नमोकार का जाप कर जीवन सफल बनाना चाहिए।आचार्य श्री अंक-ज्ञान में एक का अंक आत्मा एक है, शुद्ध है।जीव दो प्रकार के मुक्त जीव ,संसारी जीव तीन का अंक रत्नत्रय सम्यक दर्शन,सम्यकज्ञान,सम्यक चरित्र चार का अंक चार गतियाँ मनुष्य , तिर्यंच , देव, नरक गति पाँच का अंक पाँच परमेष्ठी अरिहंत,सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय साधु छह का अंक छह द्रव्य जीव,पुद्गल, धर्म,अधर्म,आकाश,काल सात का अंक सात तत्त्व जीव, अजीव,आस्रव, बंध,संवर,निर्जरा,मोक्ष का ज्ञान कराता है राजेश पंचोलिया, सुरेश सबलावत,भागचंद चूड़ीवाल के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया किआठ का अंक आठ कर्म ज्ञानावरण,दर्शनावरण,वेदनीय,मोहनीय,आयु,नाम,गोत्र,अंतराय नौ का अंक सात तत्त्वों में पुण्य और पाप जोड़कर नौ पदार्थ होते हैं। दस का अंक दस धर्म क्षमा, मार्दव,आर्जव ,शौच सत्य,संयम,तप त्याग,आकिंचन्य ओर ब्रह्मचर्य है ग्यारह का अंक श्रावक की ग्यारह प्रतिमाएँ आत्मशुद्धि और संयम की सीढ़ियाँ हैं।बारह का अंक बारह भावनाएँ अनित्य, अशरण ,संसार,एकत्व, अन्यत्व* अशुचि, आस्रव संवर निर्जरा,लोक ,बोधिदुर्लभ ओर धर्म है । 14 वे गुण स्थान पर जाने के लिए रत्नत्रय संयम 13 प्रकार का चारित्र अनिवार्य है इस प्रकार सभी को सरल शैली में जैन सिद्धांतों का ज्ञान कराया गया।गीत, संवाद और अंक-ज्ञान के माध्यम से धर्म शिक्षा का यह सुंदर आयोजन अत्यंत प्रेरणादायक रहा। सुनीता चूड़ीवाल के अनुसार आचार्य श्री संघ सानिध्य में 21 मई से 10 दिवसीय धर्म संस्कार शिविर प्रारंभ होगा
राजेश पंचोलिया इंदौर
